जोधपुर भीतरी शहर: पदमसर में श्रद्धालुओं ने पूर्वजों के लिए किया तर्पण
- Posted on 4 अक्टूबर 2026
- जोधपुर
- By Rajendra Harsh
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जोधपुर। श्राद्ध पक्ष के अवसर पर जोधपुर के भीतरी शहर स्थित ब्रह्मपुरी पदमसर में पूर्वजों के निमित्त तर्पण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में जातकों ने विधि-विधान के साथ अपने पितरों का स्मरण कर तर्पण किया और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की। कार्यक्रम के दौरान पंडित वीरेंद्र राज जोशी, ब्रह्मपुरी ने श्राद्ध पक्ष और तर्पण की धार्मिक मान्यताओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हिंदू परंपरा में श्राद्ध पक्ष को पितरों के प्रति श्रद्धा और स्मरण का विशेष अवसर माना जाता है। मान्यता के अनुसार इस अवधि में पितृजनों का स्मरण कर तर्पण और श्राद्ध कर्म करने से परिवार को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
जोधपुर। श्राद्ध पक्ष के अवसर पर जोधपुर के भीतरी शहर स्थित ब्रह्मपुरी पदमसर में पूर्वजों के निमित्त तर्पण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में जातकों ने विधि-विधान के साथ अपने पितरों का स्मरण कर तर्पण किया और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त की।
कार्यक्रम के दौरान पंडित वीरेंद्र राज जोशी, ब्रह्मपुरी ने श्राद्ध पक्ष और तर्पण की धार्मिक मान्यताओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हिंदू परंपरा में श्राद्ध पक्ष को पितरों के प्रति श्रद्धा और स्मरण का विशेष अवसर माना जाता है। मान्यता के अनुसार इस अवधि में पितृजनों का स्मरण कर तर्पण और श्राद्ध कर्म करने से परिवार को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
इस अवसर पर समाजसेवी एवं सोशल मीडिया प्रभारी राजेंद्र सांखला ने अपनी माताजी की पुण्य स्मृति में पदमसर में तर्पण कार्यक्रम करवाया। उनके साथ कई जातकों ने भी पंडित के सान्निध्य में विधि-विधान से तर्पण की प्रक्रिया पूरी की। श्रद्धालुओं ने पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए उनके निमित्त जल अर्पित किया और परिवार की सुख-शांति की कामना की।
पंडित वीरेंद्र राज जोशी ने बताया कि तर्पण के दौरान धार्मिक विधि के अनुसार पितरों को जल अर्पित किया जाता है। इसके बाद पितरों के निमित्त तैयार किए गए भोजन और जल में से कुछ अंश कौवे, गाय और कुत्ते के लिए निकालने की परंपरा भी निभाई जाती है। उन्होंने कहा कि यह परंपरा भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं में लंबे समय से चली आ रही है।
कार्यक्रम में शामिल श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्ण वातावरण में अपने पूर्वजों का स्मरण किया। तर्पण के माध्यम से उन्होंने अपने पितरों के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा प्रकट की। श्राद्ध पक्ष के दौरान पदमसर सहित शहर के विभिन्न स्थानों पर पितरों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान और तर्पण किए जा रहे हैं।
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