ज्ञानदीप’ पुस्तक का हुआ लोकार्पण

जोधपुर। महिलाओं की साहित्यिक संस्था संभावना के तत्वावधान में लेखिका सुशीला भंडारी के काव्य संग्रह ‘ज्ञानदीप’ का भव्य लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. पद्मजा शर्मा ने कहा कि “इस काव्य संग्रह की कविताओं में ज्ञान का दीप प्रज्वलित है। एक शिक्षक और जिम्मेदार नागरिक होने के नाते लेखिका ने केवल पुस्तकीय ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन के महत्वपूर्ण पाठ भी स्वयं जिए और समाज को दिए हैं।”

 

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साहित्यिक व ‘संभावना’ संस्था द्वारा ‘ज्ञानदीप’ पुस्तक का हुआ लोकार्पण

जोधपुर। महिलाओं की साहित्यिक संस्था संभावना के तत्वावधान में लेखिका सुशीला भंडारी के काव्य संग्रह ‘ज्ञानदीप’ का भव्य लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. पद्मजा शर्मा ने कहा कि “इस काव्य संग्रह की कविताओं में ज्ञान का दीप प्रज्वलित है। एक शिक्षक और जिम्मेदार नागरिक होने के नाते लेखिका ने केवल पुस्तकीय ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन के महत्वपूर्ण पाठ भी स्वयं जिए और समाज को दिए हैं।”

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सत्यदेव सवितेंद्र ने अपने उद्बोधन में कहा कि जो साहित्यकार अपने परिवेश को गहराई से पढ़कर और समझकर लिखते हैं, वही कालजयी रचनाकार बनते हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में लेखक के सामने अनेक चुनौतियां हैं, जिन पर खरा उतरकर ही वह भावी पीढ़ी को सार्थक साहित्य दे सकता है।

विशिष्ट अतिथि प्रो. चंद्रा सदायत ने शिक्षा और साहित्य के सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सुशीला भंडारी की कविताएं समाज के समक्ष कई प्रश्न खड़े करती हैं और साथ ही उनके समाधान की दिशा भी दिखाती हैं। डॉ. अंजना चौधरी ने पत्र वाचन के माध्यम से ‘ज्ञानदीप’ काव्य संग्रह का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया और इसकी रचनात्मक विशेषताओं को रेखांकित किया।

लेखिका सुशीला भंडारी ने अपने वक्तव्य में अपनी जीवन यात्रा और सृजन यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने परिवार को निरंतर सहयोग के लिए धन्यवाद दिया तथा कहा कि आज के समय में रिश्तों को बचाए रखना भी एक बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी है।

संस्था संभावना की अध्यक्ष बसंती पवार ने अतिथियों का भावभीना स्वागत किया, जबकि संरक्षक डॉ. चांद कौर जोशी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का सफल संचालन मंजू शर्मा ‘मनि’ ने किया।

इस अवसर पर डॉ. कमल मोहनोत, नीना छिब्बर, खेमकरण लालस, रेणुका, श्रीवास्तव, निम्बावत, भावेंद्र, शरद जैन सहित शहर के अनेक जाने-माने साहित्यकार, साहित्य प्रेमी एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम साहित्यिक गरिमा और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।

 

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Author
Rajendra Harsh
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