घोष मन में उत्साह और उमंग का संचार करता है

जोधपुर। मकर संक्रांति के पावन पर्व माघ कृष्ण एकादशी, बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के घोष वादकों द्वारा शहर में सांस्कृतिक एवं अनुशासनात्मक वातावरण का सृजन किया गया। रातानाडा स्थित गणेश मंदिर में संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं एवं स्वयंसेवकों ने विधिवत पूजा-अर्चना कर आगामी नवंबर माह में आयोजित होने वाले घोष शिविर ‘मरुनिनाद’ का प्रथम निमंत्रण दिया।

 

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घोष मन में उत्साह और उमंग का संचार करता है – प्रांत संघचालक

जोधपुर। मकर संक्रांति के पावन पर्व माघ कृष्ण एकादशी, बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के घोष वादकों द्वारा शहर में सांस्कृतिक एवं अनुशासनात्मक वातावरण का सृजन किया गया। रातानाडा स्थित गणेश मंदिर में संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं एवं स्वयंसेवकों ने विधिवत पूजा-अर्चना कर आगामी नवंबर माह में आयोजित होने वाले घोष शिविर ‘मरुनिनाद’ का प्रथम निमंत्रण दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत भगवान गणेश की वंदना के साथ हुई, जिसमें घोष वादकों ने वादन कर वातावरण को भक्तिमय और ऊर्जावान बना दिया। महानगर कार्यवाह भरत जांगिड ने जानकारी देते हुए बताया कि इस अवसर पर मंदिर प्रांगण में शहर के लगभग 80 घोष वादकों ने एक साथ घोष का वादन किया। वादकों की एकरूपता, लयबद्धता और अनुशासन ने उपस्थित जनसमूह को विशेष रूप से प्रभावित किया।

उन्होंने बताया कि आगामी 12 से 15 नवंबर तक जोधपुर में पूरे प्रांत के वादकों का भव्य घोष शिविर आयोजित किया जाएगा। इस शिविर में जोधपुर प्रांत के विभिन्न जिलों से आने वाले घोष वादक भाग लेंगे, जहां उन्हें घोष की विविध रचनाओं का अभ्यास एवं प्रशिक्षण दिया जाएगा। शिविर का उद्देश्य घोष वादन के माध्यम से शारीरिक, मानसिक एवं सांस्कृतिक विकास को सुदृढ़ करना है।

इस अवसर पर प्रांत संघचालक हरदयाल ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि घोष केवल वादन नहीं, बल्कि यह व्यक्ति के मन और हृदय में उत्साह, उमंग और ऊर्जा का संचार करता है। उन्होंने कहा कि घोष स्वयंसेवक को अनुशासन, सामूहिकता और लय के साथ आगे बढ़ने का सामर्थ प्रदान करता है, जो राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कार्यक्रम में क्षेत्र शारीरिक प्रमुख गंगा विष्णु, प्रांत घोष प्रमुख रामचंद्र, वरिष्ठ कार्यकर्ता खुशाल सहित संघ के अनेक पदाधिकारी एवं स्वयंसेवक उपस्थित रहे। सभी ने घोष शिविर ‘मरुनिनाद’ की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं तथा अधिक से अधिक स्वयंसेवकों को इसमें भाग लेने का आह्वान किया। कार्यक्रम का समापन संघ गीत एवं प्रसाद वितरण के साथ हुआ।

 
 
 
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Author
Rajendra Harsh
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