सूर्य नगरी में होगा गौरव नौसैनिक प्रांतीय समागम का आयोजन
- Posted on 2 जनवरी 2026
- सामान्य समाचार
- By Rajendra Harsh
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अदम्य साहस और अनुशासन के साथ सशस्त्र सेनाओं के नौसेना में सेवा प्रदान कर चुके नाविक , जेसीओ और अधिकारियों की नौसैनिक कल्याण संस्था जोधपुर द्वारा 4 जनवरी 2026 को सूर्यनगरी में संस्था के अध्यक्ष कमांडर पोकर राम ज्याणी, कमांडर लक्ष्मण सिंह कर्मसोत की सदारत में प्रांतीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है
अदम्य साहस और अनुशासन के साथ सशस्त्र सेनाओं के नौसेना में सेवा प्रदान कर चुके नाविक , जेसीओ और अधिकारियों की नौसैनिक कल्याण संस्था जोधपुर द्वारा 4 जनवरी 2026 को सूर्यनगरी में संस्था के अध्यक्ष कमांडर पोकर राम ज्याणी, कमांडर लक्ष्मण सिंह कर्मसोत की सदारत में प्रांतीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है !.संस्था के सचिव डॉ बंशीधर बिश्नोई ने बताया कि आज संस्था द्वारा प्रांतीय सम्मेलन के पोस्टर का विमोचन पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता जी आर पूनिया, मोटिवेशनल स्पीकर समाजसेवी डॉ बी एल जाखड़ , छगाराम सुथार, पूसाराम चौधरी , रिडमल सिंह भाटी, जुगराज लखारा, कोषाध्यक्ष शंभू दान चारण की उपस्थिति में किया गया!
डॉ बिश्नोई ने बताया कि दिल्ली मुख्यालय से चीफ ऑफ नेवल पर्सनल वाइस एडमिरल नायर और कमांडर दशरथ सिंह के मुख्य आतिथ्य में 80 वर्ष से अधिक गौरव नौसेनानी तथा वीर नारियों का सम्मान किया जाएगा ! सम्मेलन में सेवानिवृत्ति के उपरांत प्राप्त होने वाले वित्तीय लाभ, राज्य सरकारों द्वारा प्रदत सुविधा , कैंटीन परिलाभ , रेलवे और रोडवेज में यात्रा के संसाधनों की छूट तथा आठवें वेतन आयोग की रिपोर्ट में सशस्त्र सेनाओ विशेष कर गौरव नौसैनिकों के कल्याण संबंधी प्रावधानों को समाहित करने के उपायों पर भी चर्चा होगी ! गंभीर अकादमिक विषयों के साथ-साथ महिला, पुरुष और परिवार के अन्य सदस्यों हेतु मनोविनोद की कई गतिविधियों का आयोजन भी किया जाएगा ! कमांडर पोकर राम ज्याणी ने बताया कि वर्ष में एक बार आयोजित होने वाला यह प्रांतीय सम्मेलन पूर्व नौसेना के परिवारों को परस्पर जोड़ने और राष्ट्र सेवा हेतु सदैव तत्पर रहने के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है! उन्होंने यह भी बताया कि अधिकांश नौसैनिक सेवानिवृत्ति के उपरांत राज्य सेवा में पुन: अपनी सक्रिय सेवाएं देते हैं , उनकी अनुशासनशील दिनचर्या से राज्य के कार्मिक वर्ग की नौकरशाही को एक सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है और परोक्ष रूप से राष्ट्र को इसका लाभ मिलता है ! हमारा प्रयास है कि हम इस सम्मेलन में भी राष्ट्र धर्म के निर्वहन तथा सनातन संस्कृति की रक्षा हेतु किए जाने वाले हमारे योगदान पर चर्चा करें!
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