निशुल्क आयुर्वेद एवं वैकल्पिक चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं

 दिसंबर। पश्चिमी राजस्थान हस्तशिल्प एवं उद्योग मेला 2026 के अंतर्गत आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने जोधपुर, 26की दिशा में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर की ओर से सराहनीय पहल की जा रही है। रावण का चबूतरा, जोधपुर में आयोजित इस मेले में विश्वविद्यालय द्वारा निशुल्क आयुर्वेद एवं वैकल्पिक चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं, जिनका बड़ी संख्या में लोग लाभ उठा रहे हैं।

 

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 दिसंबर। पश्चिमी राजस्थान हस्तशिल्प एवं उद्योग मेला 2026 के अंतर्गत आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने जोधपुर, 26की दिशा में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर की ओर से सराहनीय पहल की जा रही है। रावण का चबूतरा, जोधपुर में आयोजित इस मेले में विश्वविद्यालय द्वारा निशुल्क आयुर्वेद एवं वैकल्पिक चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं, जिनका बड़ी संख्या में लोग लाभ उठा रहे हैं।

विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर वैद्य गोविंद सहाय शुक्ल के निर्देशन में मेले में पंचकर्म चिकित्सा, प्रकृति परीक्षण एवं नाड़ी परीक्षण, स्वर्णप्राशन, नशामुक्ति परामर्श, सामान्य आयुर्वेद चिकित्सा, होम्योपैथी चिकित्सा, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा जैसी विविध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों की प्रगति का भी प्रदर्शन किया गया है, जिससे आमजन को आयुर्वेद की वैज्ञानिक उपयोगिता और महत्व की जानकारी मिल रही है।

कुलगुरु प्रोफेसर शुक्ल ने स्वयं मेला स्थल पर पहुंचकर विश्वविद्यालय द्वारा दी जा रही चिकित्सा सुविधाओं का अवलोकन किया और चिकित्सा दल को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से आयुर्वेद एवं वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर मिलता है, जिससे समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ती है।

मेले के दौरान आयुर्वेद सामान्य चिकित्सा के अंतर्गत 52 बच्चों को स्वर्णप्राशन ड्रॉप पिलाई गई। वहीं 92 लोगों का प्रकृति परीक्षण एवं नाड़ी परीक्षण किया गया। इसके अतिरिक्त 72 लोगों ने होम्योपैथी चिकित्सा का तथा 68 लोगों ने योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा सेवाओं का लाभ उठाया। नशामुक्ति एवं स्वास्थ्य परामर्श सेवाओं को लेकर भी लोगों में विशेष उत्साह देखा गया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्राचार्य चंदन सिंह, क्रिया शारीर विभागाध्यक्ष प्रो. दिनेश चंद्र शर्मा, पंचकर्म विभागाध्यक्ष प्रो. ज्ञान प्रकाश शर्मा, मेला प्रभारी डॉ. जोगेंद्र प्रजापत, काय चिकित्सा के डॉ. करण सिंह, डॉ. पूजा, होम्योपैथी चिकित्सक डॉ. नरेन पटवा, डॉ. भंवरलाल पटेल सहित स्नातकोत्तर अध्येताओं ने सक्रिय रूप से चिकित्सा सेवाएं प्रदान कीं।

हस्तशिल्प मेले में आयुर्वेद विश्वविद्यालय की यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बना रही है, बल्कि आयुर्वेद को जन-आंदोलन के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

 
 
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Author
Rajendra Harsh
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