मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 10:11 AM

दशहरा मैदान में तैयार हुआ कृत्रिम तालाब, कायलाना झील बचाने की अपील

जोधपुर। पर्यावरण संरक्षण और गणेश प्रतिमाओं के पर्यावरण अनुकूल विसर्जन को लेकर दशहरा मैदान, 16 सेक्टर हाउसिंग बोर्ड में इस वर्ष भी कृत्रिम तालाब तैयार किया गया है। नगर निगम जोधपुर के सहयोग और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी से तैयार किए गए इस तालाब का उद्देश्य प्राकृतिक जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाना और श्रद्धालुओं को वैकल्पिक विसर्जन स्थल उपलब्ध कराना है। लोगों से स्थायी गणेश प्रतिमा को घर में ही स्थापित रखकर 3, 7 या 10 दिन पूजा के बाद पुनः घर में स्थापित करने की पर्यावरण हितैषी परंपरा अपनाने की अपील भी की गई है। अभियान में नगर निगम, उत्थान ग्रुप फाउंडेशन, गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा, ग्रीन एनवायरमेंट सोसाइटी, रॉबिनहुड आर्मी, महादेव व्यायामशाला महाकल्प वृक्ष फाउंडेशन और नंदनवन मयूर सेवा समिति सहित कई संस्थाएं सहयोग कर रही हैं।

 

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जोधपुर। पर्यावरण संरक्षण और गणेश प्रतिमाओं के पर्यावरण अनुकूल विसर्जन को लेकर दशहरा मैदान, 16 सेक्टर हाउसिंग बोर्ड में इस वर्ष भी कृत्रिम तालाब तैयार किया गया है। नगर निगम जोधपुर के सहयोग और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी से तैयार किए गए इस तालाब का उद्देश्य प्राकृतिक जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाना और श्रद्धालुओं को वैकल्पिक विसर्जन स्थल उपलब्ध कराना है।

अभियान का नेतृत्व पर्यावरण प्रेमी एवं नगर निगम जोधपुर के ब्रांड एंबेसडर पंडित जीवराज श्रीमाली कर रहे हैं। समिति ने शहरवासियों से अपील की है कि गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए कायलाना झील सहित अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों का उपयोग नहीं करें और कृत्रिम तालाब में ही विसर्जन करें।

समिति के अनुसार कायलाना झील की स्वच्छता के लिए पिछले करीब 120 दिनों से लगातार सफाई अभियान चलाया जा रहा है। अभियान में अब तक 2000 से अधिक श्रमवीरों और स्वयंसेवकों ने श्रमदान किया है। इस दौरान झील से प्लास्टिक, थैलियां, कपड़े और अन्य अपशिष्ट सामग्री बड़ी मात्रा में निकाली गई है।

पंडित जीवराज श्रीमाली ने बताया कि पिछले करीब 10 वर्षों से गुरु के तालाब की सफाई और कायाकल्प के कार्य से जुड़े अनुभव का उपयोग कायलाना झील को स्वच्छ रखने के अभियान में किया जा रहा है। समिति ने बताया कि गणेश प्रतिमाओं के साथ कई बार वस्त्र, चुनरी और प्लास्टिक से बनी सजावटी सामग्री भी जल स्रोतों में प्रवाहित कर दी जाती है, जिससे पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

समिति ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि प्रतिमाओं के वस्त्र, चुनरी और प्लास्टिक सामग्री जल स्रोतों में न डालें, बल्कि इन्हें विसर्जन स्थल पर मौजूद टीम को सौंप दें। इन सामग्रियों को रीसाइक्लिंग और रीयूज के लिए अलग करने की व्यवस्था की जाएगी।

समिति ने मिट्टी की गणेश प्रतिमाओं को प्राथमिकता देने की अपील की है। साथ ही POP या केमिकल रंगों वाली प्रतिमाओं को भी कृत्रिम विसर्जन स्थल पर लाने की सुविधा दी गई है, जहां उन्हें सम्मानपूर्वक स्वीकार कर विसर्जन के बाद रीसाइक्लिंग एवं रीयूज के लिए भेजने की व्यवस्था की जाएगी।

लोगों से स्थायी गणेश प्रतिमा को घर में ही स्थापित रखकर 3, 7 या 10 दिन पूजा के बाद पुनः घर में स्थापित करने की पर्यावरण हितैषी परंपरा अपनाने की अपील भी की गई है। अभियान में नगर निगम, उत्थान ग्रुप फाउंडेशन, गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा, ग्रीन एनवायरमेंट सोसाइटी, रॉबिनहुड आर्मी, महादेव व्यायामशाला महाकल्प वृक्ष फाउंडेशन और नंदनवन मयूर सेवा समिति सहित कई संस्थाएं सहयोग कर रही हैं।

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Author
Rajendra Harsh
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