तिलवाड़ा में विश्व प्रसिद्ध मल्लिनाथ पशु मेले का झंडारोपण के साथ शुभारंभ
बाड़मेर जिले के तिलवाड़ा में विश्व प्रसिद्ध मल्लिनाथ पशु मेले का रविवार को विधिवत शुभारंभ झंडारोपण के साथ हुआ। मेले के उद्घाटन समारोह में राज्य मंत्री के.के. बिश्नोई मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान जिला कलेक्टर सुशील कुमार यादव और पुलिस अधीक्षक रमेश कुमार भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री अमराराम चौधरी सहित कई गणमान्य नागरिक, व्यापारी और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया।
शुभारंभ समारोह में पारंपरिक विधि-विधान के साथ झंडारोपण किया गया। इसके बाद अतिथियों ने मेले में की गई व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और पशुपालकों व व्यापारियों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने मेले में आने वाले पशुपालकों और आगंतुकों के लिए प्रशासन की ओर से की गई व्यवस्थाओं की जानकारी भी ली।
मुख्य अतिथि राज्य मंत्री के.के. बिश्नोई ने कहा कि मल्लिनाथ पशु मेला राजस्थान की समृद्ध पशुपालन परंपरा और ग्रामीण संस्कृति का महत्वपूर्ण प्रतीक है। इस मेले के माध्यम से न केवल पशुपालकों को अपने पशुओं की खरीद-फरोख्त का बड़ा मंच मिलता है, बल्कि यह क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि सरकार ग्रामीण विकास और पशुपालकों के हितों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है।
जिला कलेक्टर सुशील कुमार यादव ने बताया कि मेले में आने वाले हजारों पशुपालकों और श्रद्धालुओं को ध्यान में रखते हुए प्रशासन की ओर से व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। पेयजल, चिकित्सा, स्वच्छता, बिजली, यातायात और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि मेले में आने वाले लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
पुलिस अधीक्षक रमेश कुमार ने बताया कि मेले में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस की विशेष तैनाती की गई है। विभिन्न स्थानों पर पुलिस बल और ट्रैफिक पुलिस को लगाया गया है, ताकि भीड़ प्रबंधन और यातायात व्यवस्था सुचारू बनी रहे।
मेले में पशुपालक बड़ी संख्या में अपने ऊंट, घोड़े, गाय, बैल और अन्य पशु लेकर पहुंचे हैं। इसके साथ ही मेले में विभिन्न प्रकार की दुकानों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पारंपरिक गतिविधियों का भी आयोजन किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण संस्कृति की झलक देखने को मिल रही है।
हर वर्ष आयोजित होने वाला यह मल्लिनाथ पशु मेला न केवल बाड़मेर बल्कि पूरे पश्चिमी राजस्थान के लिए आस्था, व्यापार और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। बड़ी संख्या में दूर-दराज से पशुपालक और पर्यटक इस मेले में भाग लेने के लिए तिलवाड़ा पहुंचते हैं।
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