पेंशनर्स सोसाइटी के महिला प्रतिनिधि मण्डल की कुलगुरू से मुलाकात

जोधपुर, 25 अप्रैल।
जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय पेंशन सोसाइटी के बैनर तले बकाया पेंशन के भुगतान की मांग को लेकर पेंशनर्स का आंदोलन शनिवार को छठे दिन भी जारी रहा। बड़ी संख्या में पेंशनर्स धरना स्थल पर एकत्रित हुए और अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।

 

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जोधपुर, 25 अप्रैल।
जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय पेंशन सोसाइटी के बैनर तले बकाया पेंशन के भुगतान की मांग को लेकर पेंशनर्स का आंदोलन शनिवार को छठे दिन भी जारी रहा। बड़ी संख्या में पेंशनर्स धरना स्थल पर एकत्रित हुए और अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।

आज प्रदर्शन के दौरान महिला पेंशनर्स के प्रतिनिधि मंडल ने महत्वपूर्ण पहल करते हुए कुलगुरु से मुलाकात की। प्रोफेसर प्रभा भंडारी और प्रोफेसर विनीता परिहार के नेतृत्व में प्रोफेसर बीना त्रिपाठी, प्रोफेसर रेणु शर्मा, प्रोफेसर सरोज कौशल, श्रीमती नसीम बानो, समीता पूनमिया तथा श्रीमती सुरेखा टाक सहित अन्य महिला पेंशनर्स ने कुलगुरु से वार्ता की। उनके आग्रह पर कुलगुरु स्वयं धरना स्थल पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से सीधा संवाद किया।

कुलगुरु ने पेंशन भुगतान में हो रही देरी के कारणों को स्पष्ट करते हुए बताया कि वित्तीय संसाधनों की कमी के चलते समय पर भुगतान संभव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि एक माह की पेंशन के भुगतान के आदेश जारी कर दिए गए हैं और जैसे ही आगे धनराशि उपलब्ध होगी, शेष बकाया पेंशन का भुगतान भी कर दिया जाएगा। हालांकि, उन्होंने इसके लिए कोई निश्चित समय-सीमा बताने में असमर्थता जताई।

कुलगुरु के इस बयान से पेंशनर्स पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी सभी बकाया पेंशन का भुगतान नहीं हो जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। हालांकि, कुलगुरु ने यह भी स्पष्ट किया कि वे संवाद के लिए हमेशा उपलब्ध हैं और पेंशनर्स जब चाहें उनसे मुलाकात कर सकते हैं, जिससे संवादहीनता की स्थिति समाप्त हो सके।

धरना स्थल पर प्रोफेसर रामनिवास शर्मा, प्रोफेसर डी.के. शर्मा, प्रोफेसर रामजीवन सेंगवा और अशोक व्यास सहित कई वक्ताओं ने संबोधित करते हुए कहा कि उनका संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि पेंशन व्यवस्था की खामियों के खिलाफ है।

पेंशनर्स ने सोमवार को भी बड़ी संख्या में उपस्थित होकर आंदोलन को और मजबूत करने का आह्वान किया।

 
 
 
 
 
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Author
Rajendra Harsh
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