जोधपुर। स्वास्थ्य साधना केंद्र में रविवार को आयोजित आहार-विचार गोष्ठी में समाजसेवी एवं चिंतक सुरेश राठी ने कहा कि “बीमारियां इसलिए आती हैं क्योंकि हम प्रकृति से दूर हो गए हैं।” उन्होंने ‘स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन’ विषय पर विचार व्यक्त करते हुए प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया। इस अवसर पर डॉ. मुस्कान सक्सेना द्वारा लिखित पुस्तक ‘प्रकृति ही चिकित्सक’ का विमोचन भी किया गया।
सुरेश राठी ने कहा कि बचपन में संसाधन कम थे, लेकिन स्वास्थ्य बेहतर था, जबकि आज सुविधाएं अधिक होने के बावजूद लोग बीमारियों से घिरे हैं। उन्होंने आधुनिक जीवनशैली को इसका मुख्य कारण बताते हुए कहा कि लोग अपने स्वास्थ्य के लिए समय नहीं निकालते। उन्होंने एलोपैथी को आपातकालीन स्थिति में उपयोगी बताते हुए प्राकृतिक चिकित्सा को दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए बेहतर बताया।
उन्होंने पंचतत्व—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश—को स्वास्थ्य का आधार बताते हुए नियमित सूर्यस्नान, खुली हवा में टहलने और प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने की सलाह दी। साथ ही खानपान में नमक, मैदा, तेल, घी और मिर्च का सीमित उपयोग करने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में डॉ. अजय उमराव ने किडनी की देखभाल के उपाय बताते हुए नैचुरोपैथी पद्धति से स्वस्थ रहने के तरीके समझाए। वहीं डॉ. मुस्कान सक्सेना ने अपनी पुस्तक का परिचय देते हुए बताया कि इसमें रोगों और उपचार योजनाओं के साथ प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों का विस्तृत विवरण दिया गया है। उन्होंने रोजाना 10 हजार कदम चलने, सूर्य नमस्कार और अनुलोम-विलोम करने की सलाह दी।
न्यासी वंदना मोदी ने स्वास्थ्य साधना केंद्र की 60 वर्षों की सेवाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यहां प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से बेहतर उपचार उपलब्ध है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए योगेश माहेश्वरी ने संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया।
इस दौरान कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे कार्यक्रम के दौरान पुस्तक का विमोचन किया गया। विमोचन समारोह में सुरेश राठी, श्रीमती शशि राठी, सौरभ राठी, श्रीमती फूलकौर मूंदड़ा, मदनलाल मूंदड़ा, योगेश माहेश्वरी, डॉ. मुस्कान सक्सेना, डॉ. अजय उमराव, वंदना मोदी सहित अन्य लोग मौजूद थे।
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