पोस्टर विमोचन के अवसर पर विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ अधिकारी और शिक्षक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्राचार्य प्रो. (डॉ.) चंदन सिंह, डीन फैकल्टी आयुर्वेद प्रो. महेंद्र कुमार शर्मा, प्रो. गोविंद गुप्ता, डीन रिसर्च प्रो. देवेंद्र चाहर, परीक्षा नियंत्रक प्रो. राजाराम अग्रवाल, प्रो. दिनेश शर्मा, डॉ. मनीषा गोयल, डॉ. निकिता पंवार तथा जेआरएफ डॉ. ज्योति जोशी सहित अन्य संकाय सदस्य मौजूद रहे। इस अवसर पर उपकुलसचिव एवं पेरिफेरल फार्माकोविजिलेंस सेंटर के समन्वयक डॉ. मनोज कुमार अदलक्खा ने कार्यक्रम की रूपरेखा और महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
डॉ. मनोज कुमार अदलक्खा ने बताया कि वर्तमान समय में विश्व स्तर पर आयुर्वेदिक, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी औषधियों तथा उनसे जुड़े उत्पादों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में इन औषधियों की सुरक्षा, गुणवत्ता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने बताया कि नेशनल फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम का उद्देश्य आयुष औषधियों के उपयोग के दौरान होने वाले संभावित दुष्प्रभावों की निगरानी करना, उनकी रिपोर्टिंग को प्रोत्साहित करना तथा औषधियों के सुरक्षित उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
उन्होंने बताया कि प्रस्तावित एक दिवसीय फार्माकोविजिलेंस अवेयरनेस प्रोग्राम में औषधियों के दुष्प्रभावों की रिपोर्टिंग, एडवर्स ड्रग रिएक्शन, मरीजों की सुरक्षा, औषधि सुरक्षा से संबंधित दस्तावेजीकरण और भ्रामक औषधीय विज्ञापनों की रोकथाम जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही प्रतिभागियों को एडवर्स ड्रग रिएक्शन तथा भ्रामक औषधीय विज्ञापनों की रिपोर्टिंग के लिए भी जागरूक किया जाएगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार यह एक दिवसीय फार्माकोविजिलेंस अवेयरनेस प्रोग्राम 14 मार्च 2026 को विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित किया जाएगा, जिसमें आयुर्वेद से जुड़े विद्यार्थी, शोधार्थी, चिकित्सक और संकाय सदस्य भाग लेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य आयुष औषधियों के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देना है।
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