साइबर थाना की बड़ी कार्रवाई

जोधपुर। शहर में बढ़ते साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के तहत साइबर पुलिस थाना जोधपुर ने फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 7 लाख 60 हजार रुपये नकद, हिसाब-किताब से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल सामग्री भी बरामद की है।

 


फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर ठगी करने वालों पर साइबर थाना की बड़ी कार्रवाई, दो गिरफ्तार

जोधपुर। शहर में बढ़ते साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के तहत साइबर पुलिस थाना जोधपुर ने फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 7 लाख 60 हजार रुपये नकद, हिसाब-किताब से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल सामग्री भी बरामद की है।

यह कार्रवाई पुलिस मुख्यालय जयपुर के निर्देशानुसार पुलिस आयुक्त शरत कविराज, पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) शाहीन सी, मेंटर साइबर पुलिस पंकज यादव तथा अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त धन्नाराम के सुपरविजन में की गई। सहायक पुलिस आयुक्त पदमदान चारण के निर्देशन में पुलिस निरीक्षक सुरेश सारण के नेतृत्व में टीम का गठन कर यह कार्रवाई अंजाम दी गई।

पुलिस ने न्यू पावर हाउस रोड स्थित एक बिल्डिंग में संचालित “एडम केपिटल” नामक कथित विदेशी कंपनी के कार्यालय पर दबिश दी। यहां से दीपक पाल सिंह और निर्मल कुमार को गिरफ्तार किया गया। दोनों आरोपी लोगों को फॉरेक्स ट्रेडिंग में निवेश का झांसा देकर ठगी कर रहे थे।

जांच में सामने आया कि आरोपी “एडम केपिटल” के नाम से कंपनी बनाकर उसे विदेशी पंजीकरण का रूप देते थे। इसके बाद निवेशकों और ब्रोकरों को हर महीने कम से कम 10 प्रतिशत मुनाफे का लालच देकर निवेश करवाया जाता था। कुछ समय बाद उसी निवेश राशि को घाटे में दिखाकर आमजन के साथ आर्थिक धोखाधड़ी की जाती थी। पुलिस के अनुसार, जोधपुर में ही हर माह करीब 5 करोड़ रुपये तक का निवेश इस फर्जी नेटवर्क के जरिए करवाया जा रहा था।

गिरफ्तार आरोपियों में दीपक पाल सिंह निवासी रूपनगर, पाल रोड तथा निर्मल लाहौटी निवासी वर्धमान नगर, शोभावतो की ढाणी शामिल हैं। दोनों से पूछताछ जारी है और इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।

पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी कंपनी में निवेश करने से पहले उसकी वैधता अवश्य जांच लें। यह सुनिश्चित करें कि कंपनी SEBI, NSE, BSE, RBI या फेमा के तहत पंजीकृत है या नहीं। बिना सत्यापन के निवेश करना आर्थिक जोखिम और अपराध दोनों हो सकता है।

 
 
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Author
Rajendra Harsh
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