महाराणा प्रताप: नवीन ज्ञातव्य पुस्तक का विमोचन

जोधपुर, 15 जून। चौपासनी शिक्षा समिति एवं मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट द्वारा संचालित राजस्थानी शोध संस्थान, चौपासनी (जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर से मान्यता प्राप्त शोध केंद्र) के तत्वावधान में शनिवार को पुस्तक विमोचन एवं समीक्षा गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम चौपासनी शिक्षा समिति के सभागार में सम्पन्न हुआ, जिसमें डॉ. हुकमसिंह भाटी द्वारा लिखित पुस्तक “महाराणा प्रताप: नवीन ज्ञातव्य” का विमोचन किया गया।

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जोधपुर, 15 जून। चौपासनी शिक्षा समिति एवं मेहरानगढ़ म्यूजियम ट्रस्ट द्वारा संचालित राजस्थानी शोध संस्थान, चौपासनी (जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर से मान्यता प्राप्त शोध केंद्र) के तत्वावधान में शनिवार को पुस्तक विमोचन एवं समीक्षा गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम चौपासनी शिक्षा समिति के सभागार में सम्पन्न हुआ, जिसमें डॉ. हुकमसिंह भाटी द्वारा लिखित पुस्तक “महाराणा प्रताप: नवीन ज्ञातव्य” का विमोचन किया गया।

पुस्तक का विमोचन चौपासनी शिक्षा समिति के अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल, जेएनवीयू इतिहास विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. भगवानसिंह शेखावत, चौपासनी शिक्षा समिति के सचिव राघवेंद्र प्रताप सिंह झालामंड, राजस्थानी शोध संस्थान उपसमिति अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह लीलियाँ तथा संस्थान के सहायक निदेशक जितेंद्र सिंह भाटी द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

इस अवसर पर डॉ. भगवानसिंह शेखावत ने पुस्तक की समीक्षा करते हुए कहा कि महाराणा प्रताप भारतीय इतिहास के महान स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक शोध के नए आयाम खोलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि महाराणा प्रताप के संकट काल में मारवाड़, जैसलमेर एवं सिंध की ओर जाने से जुड़े नए तथ्य इतिहास लेखन के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने देशज स्रोतों के अध्ययन पर आधारित इतिहास के पुनर्लेखन की आवश्यकता पर बल दिया।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए रावल किशन सिंह जसोल ने कहा कि राजस्थान के योद्धाओं ने स्वतंत्रता और आत्मसम्मान के लिए लंबा संघर्ष किया है। महाराणा प्रताप आज भी प्रेरणा के स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि पुस्तक में प्रस्तुत नए तथ्य शोध की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

लेखक डॉ. हुकमसिंह भाटी ने पुस्तक की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसमें देशज स्रोतों के आधार पर ऐतिहासिक तथ्यों को प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने हल्दीघाटी युद्ध एवं महाराणा प्रताप के संघर्ष काल से जुड़े अनेक नए पहलुओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप का संघर्ष भारतीय इतिहास का उज्ज्वल अध्याय है।

कार्यक्रम में जेएनवीयू इतिहास विभाग की अध्यक्ष प्रो. सुशीला शक्तावत, हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. महिपालसिंह राठौड़, कर्नल शम्भुसिंह देवड़ा, डॉ. प्रेमसिंह राजपुरोहित, डॉ. दिनेश राठी सहित अनेक शिक्षाविद, शोधकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन शोध अधिकारी डॉ. सद्दीक मोहम्मद ने किया तथा अंत में धन्यवाद ज्ञापन राजेन्द्र सिंह लीलियाँ द्वारा प्रस्तुत किया गया।

 
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Author
Rajendra Harsh
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