बाल गृहों एवं आस्था वृद्धाश्रम का औचक निरीक्षण

जोधपुर, 15 जून। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं जिला एवं सेशन न्यायाधीश, जोधपुर महानगर के अध्यक्ष दिनेश त्यागी के निर्देशन में सोमवार को विभिन्न बाल गृहों एवं वृद्धाश्रम का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण का उद्देश्य वहां निवासरत बच्चों एवं वरिष्ठ नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का मूल्यांकन करना तथा आवश्यक सुधार सुनिश्चित करना था। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जोधपुर महानगर के सचिव राकेश रामावत ने लवकुश बाल विकास केंद्र, गायत्री बालिका गृह तथा बाल शोभा गृह का मासिक औचक निरीक्षण किया।

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जोधपुर, 15 जून। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं जिला एवं सेशन न्यायाधीश, जोधपुर महानगर के अध्यक्ष दिनेश त्यागी के निर्देशन में सोमवार को विभिन्न बाल गृहों एवं वृद्धाश्रम का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण का उद्देश्य वहां निवासरत बच्चों एवं वरिष्ठ नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का मूल्यांकन करना तथा आवश्यक सुधार सुनिश्चित करना था।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जोधपुर महानगर के सचिव राकेश रामावत ने लवकुश बाल विकास केंद्र, गायत्री बालिका गृह तथा बाल शोभा गृह का मासिक औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने संस्थानों में रह रहे बच्चों से सीधे संवाद कर उनकी दिनचर्या, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यकताओं के बारे में जानकारी प्राप्त की।

सचिव ने बच्चों को उपलब्ध कराए जा रहे भोजन, चिकित्सा सुविधाओं, स्वच्छता व्यवस्था, सुरक्षा, आवासीय सुविधाओं तथा अन्य व्यवस्थाओं की विस्तृत जांच की। निरीक्षण के दौरान संबंधित अधिकारियों एवं संस्थान प्रबंधन को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए ताकि बच्चों को बेहतर वातावरण और सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

इसके पश्चात सचिव द्वारा आस्था वृद्धाश्रम, जोधपुर का भी निरीक्षण किया गया। वृद्धाश्रम में निवासरत वरिष्ठ नागरिकों से बातचीत कर उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं तथा उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी ली गई। उन्होंने भोजन, चिकित्सा सुविधा, स्वच्छता, रहन-सहन तथा अन्य बुनियादी व्यवस्थाओं का अवलोकन किया।

निरीक्षण के दौरान पाया गया कि संस्थानों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, वहीं कुछ व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए सुझाव भी दिए गए। सचिव ने संबंधित प्रबंधन को निर्देशित किया कि बच्चों एवं वृद्धजनों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देते हुए उनकी देखभाल में किसी प्रकार की कमी नहीं रहने दी जाए।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा समय-समय पर ऐसे निरीक्षण किए जाते हैं, ताकि संवेदनशील वर्गों के लिए संचालित संस्थानों में निर्धारित मानकों के अनुरूप सुविधाएं सुनिश्चित की जा सकें तथा उनके अधिकारों और कल्याण की प्रभावी निगरानी बनी रहे।

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Author
Rajendra Harsh
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