जयपुर। खेजड़ी वृक्षों के संरक्षण और प्रस्तावित “ट्री एक्ट” कानून को लेकर आज जयपुर में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर कमेटी के अध्यक्ष एवं कानून मंत्री जोगाराम पटेल से संत सानिध्य में पर्यावरण संघर्ष समिति के संयोजक परसराम बिश्नोई सहित अन्य सदस्यों ने शिष्टाचार भेंट कर अपने सुझाव प्रस्तुत किए।
बैठक के दौरान समिति ने खेजड़ी वृक्षों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए एक विस्तृत सुझाव पत्र मंत्री को सौंपा। समिति ने बताया कि वर्तमान समय में खेजड़ी वृक्षों की अवैध कटाई, रासायनिक क्षति तथा औद्योगिक और सोलर परियोजनाओं के कारण बड़े पैमाने पर नुकसान हो रहा है। इसे रोकने के लिए सख्त और प्रभावी कानूनी प्रावधान जरूरी हैं।
समिति ने सुझाव दिया कि खेजड़ी वृक्ष को “प्रोटेक्टेड हेरिटेज ट्री” का दर्जा दिया जाए तथा इसकी अवैध कटाई को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध घोषित किया जाए। इसके साथ ही अवैध कटाई करने वालों पर 2 लाख से 5 लाख रुपये तक का जुर्माना और 3 से 7 वर्ष तक के कारावास का प्रावधान किया जाए। सभी वृक्षों की जियो-टैगिंग और डिजिटल रिकॉर्डिंग अनिवार्य करने की भी मांग रखी गई।
इसके अलावा समिति ने सोलर एवं औद्योगिक परियोजनाओं से पूर्व पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) और स्वीकृति को अनिवार्य बनाने, एक पेड़ के बदले न्यूनतम 20 पौधे लगाने तथा उनकी देखरेख सुनिश्चित करने की बात कही। समयबद्ध न्याय के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट या ग्रीन ट्रिब्यूनल के माध्यम से छह माह में मामलों के निस्तारण का सुझाव भी दिया गया।
बैठक में किसानों को खेजड़ी संरक्षण के लिए आर्थिक प्रोत्साहन देने और जनभागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। इस दौरान महंत स्वामी आनंद प्रकाश, जांबा, रामगोपाल माल, सुभाष बिश्नोई, महीराम दिलोईया, हरिराम खीचड़, निरमा बिश्नोई, पूनम बिश्नोई, रामनिवास, भंवरलाल बिश्नोई और सुरेश बिश्नोई सहित कई सदस्य उपस्थित रहे।
समिति ने सरकार से मांग की कि इन सुझावों को प्रस्तावित कानून में शामिल कर प्रभावी कदम उठाए जाएं, अन्यथा भविष्य में जनआंदोलन किया जाएगा।
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