आईआईटी जोधपुर में आईएएस अधिकारी प्रशिक्षुओं का स्वागत, अत्याधुनिक अनुसंधान और नवाचार तंत्र का किया अवलोकन
जोधपुर, 7 मार्च। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर (आईआईटी जोधपुर) में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए), मसूरी के 2025 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी प्रशिक्षुओं के दल ने विंटर स्टडी टूर (डब्ल्यूएसटी) के तहत संस्थान का दौरा किया। इस अवसर पर संस्थान प्रशासन ने उनका स्वागत करते हुए आईआईटी जोधपुर की शैक्षणिक, अनुसंधान और नवाचार गतिविधियों से अवगत कराया।
अधिकारी प्रशिक्षुओं के दल में जयकुमार शंकर आडे, सिद्धार्थ पोखरा (एसोसिएट ग्रुप लीडर), सौम्या मिश्रा, सरन्या एस., मोहम्मद शौकत अजीम, ईशांत जायसवाल, हेमंत, अरविंद राधाकृष्णन, अपूर्वा सिंह तथा नम्रता अग्रवाल (ग्रुप लीडर) शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने आईआईटी जोधपुर के निदेशक प्रो. अविनाश कुमार अग्रवाल से मुलाकात की। इस दौरान प्रो. अग्रवाल ने संस्थान के विजन, शैक्षणिक पारिस्थितिकी तंत्र तथा देश के तकनीकी भविष्य को आकार देने में आईआईटी जोधपुर की भूमिका के बारे में जानकारी दी। उन्होंने संस्थान में उपलब्ध अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं, अंतर्विषयी अनुसंधान संस्कृति और उच्च प्रशिक्षित मानव संसाधन पर भी प्रकाश डाला।
प्रो. अग्रवाल ने अधिकारियों को परिसर के विशिष्ट पारिस्थितिक वातावरण से भी परिचित कराया और बताया कि आईआईटी जोधपुर सतत विकास तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा, सतत विकास और उन्नत विनिर्माण जैसे राष्ट्रीय प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में चल रहे शोध कार्यों की भी जानकारी दी।
दौरे के दौरान आईएएस प्रशिक्षुओं ने स्कूल ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड डेटा साइंस के अंतर्गत स्थापित कॉग्निटिव इंजीनियरिंग प्रयोगशाला का भ्रमण किया, जहां उन्हें मानव-एआई अंतःक्रिया और बुद्धिमान प्रणालियों पर चल रहे शोध कार्यों से अवगत कराया गया। इसके अलावा उन्होंने आनंद राठी टिंकरर्स लैब का भी अवलोकन किया, जो छात्रों में रचनात्मकता, डिजाइन थिंकिंग और व्यावहारिक समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने के लिए स्थापित नवाचार मंच है।
अधिकारियों ने आईआईटी जोधपुर की खेल सुविधाओं और परिसर के प्राकृतिक परिवेश का भी अवलोकन किया तथा जैव विविधता और सतत नियोजन की सराहना की। कार्यक्रम के अंत में प्रशिक्षुओं ने संस्थान की सशक्त अनुसंधान संस्कृति और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे संस्थान देश के समावेशी विकास और तकनीकी नेतृत्व को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
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