मानवता और विश्वास जिंदा है

बालोतरा। राजस्थान की धरती पर मानवता और ईमानदारी की मिसालें आज भी जीवित हैं। इसका ताजा उदाहरण समदड़ी निवासी उम्मेदाराम तिरगटी ने पेश किया है, जिन्होंने ट्रेन में मिले 50 हजार रुपये बिना किसी लालच के वापस लौटाकर समाज के सामने प्रेरणादायक उदाहरण रखा।

 

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बालोतरा। राजस्थान की धरती पर मानवता और ईमानदारी की मिसालें आज भी जीवित हैं। इसका ताजा उदाहरण समदड़ी निवासी उम्मेदाराम तिरगटी ने पेश किया है, जिन्होंने ट्रेन में मिले 50 हजार रुपये बिना किसी लालच के वापस लौटाकर समाज के सामने प्रेरणादायक उदाहरण रखा।

जानकारी के अनुसार, उम्मेदाराम तिरगटी ट्रेन संख्या 20953 चेन्नई-अहमदाबाद सुपरफास्ट एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे थे। यात्रा के दौरान जब ट्रेन गुंतकल रेलवे स्टेशन (आंध्र प्रदेश) पहुंची, तब उन्हें अपनी सीट के नीचे एक बैग में 50,000 रुपये मिले। इतनी बड़ी रकम मिलने के बावजूद उन्होंने ईमानदारी का परिचय देते हुए उस धनराशि को अपने पास रखने के बजाय तुरंत रेलवे पुलिस को सौंप दिया।

उम्मेदाराम के इस कदम ने यह साबित कर दिया कि आज भी समाज में ऐसे लोग मौजूद हैं, जो लालच से ऊपर उठकर सच्चाई और नैतिकता का रास्ता चुनते हैं। उनके इस कार्य की स्थानीय लोगों सहित यात्रियों द्वारा भी सराहना की जा रही है।

रेलवे पुलिस ने भी उम्मेदाराम तिरगटी की ईमानदारी की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे उदाहरण समाज के लिए प्रेरणास्रोत होते हैं। उनके इस कदम से न केवल खोई हुई रकम उसके असली मालिक तक पहुंचने की उम्मीद जगी है, बल्कि समाज में विश्वास और इंसानियत की भावना भी मजबूत हुई है।

समदड़ी क्षेत्र में उम्मेदाराम तिरगटी के इस सराहनीय कार्य की चर्चा जोरों पर है। लोगों का कहना है कि ऐसे कर्म ही राजस्थान की असली पहचान हैं, जहां आज भी “पधारो म्हारे देश” की भावना के साथ ईमानदारी और मानवता को सर्वोपरि माना जाता है।

 
 
 
 
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Author
Rajendra Harsh
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