जोधपुर की लाडली गीता की संदिग्ध मौत, गुजरात पुलिस पर आरोपी पति को बचाने के आरोप
जोधपुर की एक विवाहिता गीता राजपुरोहित की अहमदाबाद में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतका के परिजनों ने गुजरात पुलिस के हैडकांस्टेबल और गीता के पति अर्जुनसिंह राजपुरोहित पर प्रताड़ना और हत्या का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिजनों का आरोप है कि गुजरात पुलिस अपने ही विभाग के कर्मचारी को बचाने में जुटी हुई है और मामले में उचित कार्रवाई नहीं कर रही।
मृतका के भाई पाल रोड निवासी नत्थूसिंह उर्फ नवीन राजपुरोहित ने जोधपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि 15 अप्रैल को अहमदाबाद स्थित जीवराज पार्क सोसायटी में उनकी बहन गीता की संदिग्ध हालत में मौत हुई थी। आरोपी पति ने फोन पर परिजनों को बताया कि गीता ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद न तो पुलिस को तुरंत सूचना दी गई और न ही एफएसएल टीम को बुलाया गया। आरोपी स्वयं गीता को फंदे से उतारकर अस्पताल ले गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
परिजनों ने बताया कि जब वे अहमदाबाद पहुंचे तो घटनास्थल की परिस्थितियां संदिग्ध लगीं। इसके बाद वासना थाने में रिपोर्ट दी गई और मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया गया। हालांकि उनका आरोप है कि पुलिस ने शुरू से ही मामले को गंभीरता से नहीं लिया। 16 अप्रैल को शिकायत देने के बावजूद एफआईआर दर्ज करने में देरी की गई और बाद में उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद 24 अप्रैल को मामला दर्ज किया गया।
मृतका के भाई ने कहा कि उनकी बहन मानसिक रूप से मजबूत थी। वह पीटीईटी की तैयारी कर रही थी और ऑनलाइन व्यापार के जरिए आत्मनिर्भर बनने का प्रयास कर रही थी। साथ ही वह अपने परिवार और बीमार सास की देखभाल भी कर रही थी। ऐसे में आत्महत्या की बात पर उन्हें विश्वास नहीं है।
परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस जांच के नाम पर उन्हें परेशान कर रही है और दस्तावेज गुजराती भाषा में तैयार करने का दबाव बनाया गया। उनका कहना है कि घटना के 23 दिन बाद भी किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई, जबकि आरोपी अर्जुनसिंह की अग्रिम जमानत अदालत से खारिज हो चुकी है।
गीता के परिजनों ने गुजरात सरकार और केंद्र सरकार से मामले की जांच सीबीआई या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की है। साथ ही मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, चैट, वीडियो, मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच करवाने की मांग भी उठाई है।
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