मरुधर एक्सप्रेस में फर्जीवाड़ा बेनकाब

जोधपुर में Marudhar Express में एक चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां एक ही टिकट का इस्तेमाल चार अलग-अलग यात्राओं के लिए किया गया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किए गए इस फर्जीवाड़े का खुलासा टिकट जांच के दौरान हुआ।


 

जोधपुर में Marudhar Express में एक चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां एक ही टिकट का इस्तेमाल चार अलग-अलग यात्राओं के लिए किया गया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किए गए इस फर्जीवाड़े का खुलासा टिकट जांच के दौरान हुआ।

उत्तर पश्चिम रेलवे के अनुसार, ट्रेन संख्या 14863 वाराणसी सिटी-जोधपुर मरुधर एक्सप्रेस के जोधपुर पहुंचने पर प्लेटफॉर्म पर सघन टिकट जांच अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात सीटीटीसी अनिकेत रामदेव को दो यात्रियों के मोबाइल टिकट पर संदेह हुआ। पहली नजर में टिकट सामान्य लग रहा था, लेकिन उनकी सतर्कता के चलते गहन जांच की गई।

जब संदिग्ध टिकट का यूटीएस नंबर हैंड हेल्ड टर्मिनल मशीन में डाला गया, तो पूरा मामला उजागर हो गया। जांच में सामने आया कि जो टिकट जोधपुर तक का दिखाया जा रहा था, वह वास्तव में 22 मार्च को कर्नाटक के कुनिगल से चन्नारायपटना के बीच मात्र 45 रुपए में जारी किया गया था और उस पर पहले ही यात्रा की जा चुकी थी।

इसके बाद उसी यूटीएस नंबर का उपयोग कर AI टूल्स के जरिए अलग-अलग तारीख और रूट के फर्जी टिकट तैयार किए गए। इनमें जयपुर-आगरा, आसरवा-उदयपुर और आगरा फोर्ट-जोधपुर जैसे रूट शामिल थे। एक ही टिकट नंबर का बार-बार उपयोग इस फर्जीवाड़े का सबसे बड़ा सुराग बना।

मामला सामने आते ही रेलवे अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई की। दोनों यात्रियों से बिना टिकट यात्रा का चार्ज वसूला गया और उन्हें वाणिज्य निरीक्षक की रिपोर्ट के साथ जीआरपी के हवाले कर दिया गया। दोनों आरोपी करीब 25 वर्ष के बताए जा रहे हैं और कर्नाटक के निवासी हैं।

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के मामलों से रेलवे को आर्थिक नुकसान होता है और टिकटिंग प्रणाली की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। Indian Railways ने स्पष्ट किया है कि AI जैसी आधुनिक तकनीक का दुरुपयोग गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

डीआरएम अनुराग त्रिपाठी के निर्देश पर जोधपुर मंडल में टिकट जांच अभियान और भी सख्त कर दिया गया है, ताकि भविष्य में इस तरह के फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाया जा सके।

 
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Author
Rajendra Harsh
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