बाड़मेर स्टेशन बन गया आकर्षण का केंद्र

जोधपुर। मरुस्थल की तपती रेत,दूर तक फैली क्षितिज रेखा और उस पर उगती आधुनिकता की एक नई किरण बाड़मेर रेलवे स्टेशन आज कुछ ऐसा ही अनुभव कराता है। 

 

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जोधपुर। मरुस्थल की तपती रेत,दूर तक फैली क्षितिज रेखा और उस पर उगती आधुनिकता की एक नई किरण बाड़मेर रेलवे स्टेशन आज कुछ ऐसा ही अनुभव कराता है। 

कभी साधारण सा दिखने वाला यह सीमावर्ती स्टेशन अब स्थापत्य कला,रोशनी और सुविधाओं का ऐसा संगम बन चुका है जो यात्रियों के मन में ठहर जाने की इच्छा जगा देता है।

सांझ के धुंधलके में जब स्टेशन रंग-बिरंगी रोशनी से नहाता है,तो यह केवल एक यातायात केंद्र नहीं रह जाता, बल्कि एक जीवंत दृश्य में परिवर्तित हो जाता है जहां हर यात्री अपने सफर के साथ एक तस्वीर,एक स्मृति और एक अनुभव भी साथ ले जाना चाहता है। मोबाइल कैमरों में कैद होती ये झलकियां इस बात की गवाही देती हैं कि विकास अब केवल सुविधा नहीं, बल्कि अनुभव भी बन चुका है।

इस परिवर्तन के पीछे है अमृत भारत स्टेशन योजना, जिसके तहत लगभग 16.18 करोड़रुपये की लागत से इस स्टेशन का कायाकल्प किया गया है। यह बदलाव केवल ईंट-पत्थरों का नहीं, बल्कि सोच का है जहां रेलवे स्टेशन को शहर के प्रवेश द्वार और पहचान के रूप में देखा जा रहा है।

बाड़मेर की धरती जो आज तेल,गैस,ऊर्जा और खनिज संपदा के कारण देश की आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बन चुकी है उसी गति से अपने परिवहन ढांचे को भी सुदृढ़ कर रही है। इसका प्रत्यक्ष प्रभाव इस स्टेशन पर दिखाई देता है,जहां प्रतिदिन हजारों यात्री आते-जाते हैं और 28 ट्रेनों का ठहराव इस क्षेत्र की बढ़ती सक्रियता का संकेत देता है।

जोधपुर मंडल के डीआरएम अनुराग त्रिपाठी के अनुसार इस पुनर्विकास का उद्देश्य केवल सुविधाएं बढ़ाना नहीं,बल्कि यात्रियों को एक ऐसा अनुभव देना है,जिसमें सुरक्षा,सुगमता और सौंदर्य का संतुलित समावेश हो।

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Author
Rajendra Harsh
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