शराब की दुकानें समय में किया गया बदलाव

राज्य सरकार ने शराब की दुकानों के संचालन समय में अहम बदलाव करते हुए बड़ा निर्णय लिया है। सरकारी आदेश के अनुसार अब प्रदेशभर में सभी अधिकृत शराब की दुकानें 1 अप्रैल 2026 से रात 10:00 बजे तक खुली रहेंगी।


जयपुर : 1 अप्रैल 2026 से रात 10 बजे तक खुलेंगी शराब की दुकानें, समय में किया गया बदलाव

राज्य सरकार ने शराब की दुकानों के संचालन समय में अहम बदलाव करते हुए बड़ा निर्णय लिया है। सरकारी आदेश के अनुसार अब प्रदेशभर में सभी अधिकृत शराब की दुकानें 1 अप्रैल 2026 से रात 10:00 बजे तक खुली रहेंगी। इससे पहले शराब दुकानों के बंद होने का समय अपेक्षाकृत पहले था, लेकिन नए आदेश के तहत समय सीमा बढ़ा दी गई है। यह आदेश आबकारी विभाग द्वारा जारी किया गया है और राज्य के सभी जिलों में समान रूप से लागू होगा।

सरकार का मानना है कि इस निर्णय से राज्य के राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। आबकारी विभाग के अधिकारियों के अनुसार लंबे समय से यह मांग की जा रही थी कि दुकानों के समय में बदलाव किया जाए, ताकि उपभोक्ताओं को सुविधा मिल सके और अवैध शराब की बिक्री पर भी अंकुश लगाया जा सके। समय बढ़ने से यह उम्मीद की जा रही है कि शराब की अवैध तस्करी और चोरी-छिपे बिक्री में कमी आएगी, जिससे सरकार को निर्धारित कर और शुल्क के रूप में अधिक राजस्व प्राप्त होगा।

हालांकि, शराब दुकानों के समय बढ़ने के फैसले को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस को विशेष निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि रात के समय शराब दुकानों के आसपास गश्त बढ़ाई जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था, झगड़े या आपराधिक गतिविधियों पर तुरंत नियंत्रण किया जा सके। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित नियमों और शर्तों का उल्लंघन करने वाली दुकानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

आबकारी विभाग ने यह भी कहा है कि शराब दुकानों को तय समय पर ही बंद करना अनिवार्य होगा और रात 10 बजे के बाद किसी भी प्रकार की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। यदि कोई दुकान नियमों का उल्लंघन करती पाई जाती है तो उस पर जुर्माना, लाइसेंस निलंबन या निरस्तीकरण जैसी कार्रवाई की जा सकती है।

यह आदेश 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा। प्रशासन ने आमजन से भी सहयोग की अपील की है, ताकि इस नए प्रावधान के तहत कानून-व्यवस्था बनी रहे और किसी प्रकार की असुविधा या अव्यवस्था उत्पन्न न हो।

 
 
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Author
Rajendra Harsh
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