जोधपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पश्चिमी राजस्थान उद्योग एवं हस्तशिल्प उत्सव 2025 के अंतर्गत स्थापित केंद्रीय पंडाल का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने राज्य स्तरीय पवेलियन का भी गहन निरीक्षण किया, जिसमें राजस्थान के सभी 41 जिलों के ‘पंच गौरव’ को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया है। पवेलियन में प्रत्येक जिले की विशिष्ट पहचान, स्थानीय उद्योग, पारंपरिक हस्तशिल्प, सांस्कृतिक विरासत और नवाचारों को एक मंच पर प्रस्तुत किया गया है।
मुख्यमंत्री ने पवेलियन में प्रदर्शित उत्पादों और प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि यह उत्सव राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, कौशल परंपरा और उद्यमशीलता का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि राज्य के कारीगरों, शिल्पकारों और लघु उद्यमियों को इस तरह के आयोजनों से न केवल पहचान मिलती है, बल्कि उन्हें बाजार से जोड़ने में भी मदद मिलती है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है और रोजगार के नए अवसर सृजित होते हैं।
मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि ‘पंच गौरव’ की अवधारणा के माध्यम से प्रत्येक जिले की ताकत, संभावनाओं और विशेषताओं को सामने लाया गया है। कृषि, उद्योग, पर्यटन, हस्तशिल्प और नवाचार जैसे क्षेत्रों में जिलों की उपलब्धियों को प्रदर्शित करना प्रदेश के समग्र विकास की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस तरह के आयोजनों को नियमित रूप से आयोजित किया जाए, ताकि स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके।
केंद्रीय पंडाल में विभिन्न स्टॉल्स पर प्रदर्शित हस्तनिर्मित वस्तुएं, पारंपरिक वस्त्र, कलाकृतियां और आधुनिक नवाचार मुख्यमंत्री के विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। उन्होंने कई स्टॉल्स पर कारीगरों और उद्यमियों से संवाद कर उनके अनुभव जाने और उन्हें प्रोत्साहित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आत्मनिर्भर राजस्थान के लक्ष्य को साकार करने के लिए उद्योग एवं हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। पश्चिमी राजस्थान उद्योग एवं हस्तशिल्प उत्सव 2025 को लेकर आमजन में उत्साह देखा गया, जो प्रदेश की सांस्कृतिक और औद्योगिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकेत है।
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