पद्मश्री सम्मान के साथ घर लौटे लोक कलाकार तगाराम भील

  • Posted on 29 मई 2026
  • खास
  • By Rajendra Harsh
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जोधपुर। थार के सुप्रसिद्ध लोक कलाकार तगाराम भील को पद्मश्री सम्मान मिलने के बाद जब वे अपने घर पहुंचे, तो परिवार और गांव में खुशी का माहौल छा गया। इस दौरान उनकी मां के साथ भावुक तस्वीर ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। तस्वीर में मां की आंखों में बेटे की सफलता का गर्व, संघर्ष की यादें और ममता साफ झलकती दिखाई दी। रेगिस्तान की मिट्टी से जुड़े तगाराम भील ने अपना पूरा जीवन लोक संगीत और अलगोजा वादन को समर्पित किया है।

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जोधपुर। थार के सुप्रसिद्ध लोक कलाकार तगाराम भील को पद्मश्री सम्मान मिलने के बाद जब वे अपने घर पहुंचे, तो परिवार और गांव में खुशी का माहौल छा गया। इस दौरान उनकी मां के साथ भावुक तस्वीर ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। तस्वीर में मां की आंखों में बेटे की सफलता का गर्व, संघर्ष की यादें और ममता साफ झलकती दिखाई दी।

रेगिस्तान की मिट्टी से जुड़े तगाराम भील ने अपना पूरा जीवन लोक संगीत और अलगोजा वादन को समर्पित किया है। थार के धोरों में बैठकर अलगोजे की मीठी धुन बिखेरने वाले इस कलाकार ने अपनी कला से राजस्थान की लोक संस्कृति को देश और दुनिया तक पहुंचाने का काम किया। वर्षों की साधना, संघर्ष और समर्पण के बाद उन्हें देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मश्री से नवाजा गया।

ग्रामीण परिवेश से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहचान बनाना तगाराम भील के लिए आसान नहीं था। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने लोक संगीत की परंपरा को जीवित रखा। उनकी धुनों में राजस्थान की मिट्टी की खुशबू और लोक जीवन की आत्मा महसूस होती है। यही कारण है कि उनकी कला ने लोगों के दिलों में विशेष स्थान बनाया।

सम्मान प्राप्त कर घर लौटने पर गांव के लोगों और परिजनों ने उनका पारंपरिक स्वागत किया। मां ने बेटे को गले लगाकर आशीर्वाद दिया तो वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। यह दृश्य केवल एक कलाकार की सफलता का नहीं, बल्कि उस मां के संघर्ष और विश्वास का प्रतीक बन गया जिसने हर कठिन दौर में अपने बेटे का हौसला बढ़ाया।

स्थानीय लोगों ने कहा कि तगाराम भील का सम्मान पूरे राजस्थान और लोक संगीत जगत के लिए गर्व का विषय है। उनकी उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति और लोक कला से जुड़े रहने की प्रेरणा देती रहेगी।

 
 
 
 
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