आयुर्वेद विश्वविद्यालय में अनुसंधान बोर्ड की बैठक

जोधपुर, 11 जून। Dr. Sarvepalli Radhakrishnan Rajasthan Ayurved University में गुरुवार को अनुसंधान बोर्ड (रिसर्च बोर्ड) की महत्वपूर्ण बैठक कुलगुरु Govind Sahay Shukla की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में विश्वविद्यालय एवं संबद्ध संस्थानों में संचालित पीएचडी कार्यक्रमों की गुणवत्ता बढ़ाने, शोध प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने तथा अनुसंधान से जुड़े विभिन्न शैक्षणिक एवं प्रशासनिक विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

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जोधपुर, 11 जून। Dr. Sarvepalli Radhakrishnan Rajasthan Ayurved University में गुरुवार को अनुसंधान बोर्ड (रिसर्च बोर्ड) की महत्वपूर्ण बैठक कुलगुरु Govind Sahay Shukla की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में विश्वविद्यालय एवं संबद्ध संस्थानों में संचालित पीएचडी कार्यक्रमों की गुणवत्ता बढ़ाने, शोध प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने तथा अनुसंधान से जुड़े विभिन्न शैक्षणिक एवं प्रशासनिक विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक में पीएचडी शोध निर्देशन के लिए न्यूनतम योग्यताओं के निर्धारण, संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षकों को शोध मार्गदर्शक के रूप में मान्यता देने तथा विश्वविद्यालय के बाहर के विशेषज्ञों को शोध मार्गदर्शन से जोड़ने जैसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया गया। इसके अलावा शोधार्थियों के विषय परिवर्तन, पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया 2025-26 के अनुमोदन, इंस्टीट्यूशनल एथिक्स कमेटी की कार्यवाही तथा विभिन्न शोध संबंधी आवेदनों पर भी चर्चा की गई।

अनुसंधान बोर्ड ने पीएचडी कोर्सवर्क परीक्षा के लिए नवीन पाठ्यक्रम लागू करने, शोधार्थियों के लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र की अनिवार्यता, संबद्ध शोध केंद्रों के निरीक्षण तथा उनकी संबद्धता से जुड़े विषयों पर भी विचार किया। बैठक में उदयपुर स्थित आयुर्वेद महाविद्यालय, पीजीआईए जोधपुर तथा प्रदेश के विभिन्न होम्योपैथिक महाविद्यालयों से प्राप्त शोध परियोजनाओं की समीक्षा भी की गई।

कुलगुरु प्रोफेसर गोविंद सहाय शुक्ल ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की पहचान उसके शोध कार्यों की गुणवत्ता से होती है। उन्होंने शोध में मौलिकता, नैतिकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर बल देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय उच्च गुणवत्ता, वैश्विक मानकों और नवाचार आधारित अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आयुष चिकित्सा पद्धतियों में समस्या-समाधान आधारित शोध की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

बैठक में शोध कार्यों को पबमेड, स्कोपस और वेब ऑफ साइंस जैसी प्रतिष्ठित शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित करने, पेटेंट को बढ़ावा देने तथा प्लेजरिज्म जांच को अनिवार्य बनाने जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। कुलगुरु ने विश्वास व्यक्त किया कि इन निर्णयों से विश्वविद्यालय में शोध संस्कृति और अधिक मजबूत होगी तथा गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को नई दिशा मिलेगी।

बैठक में पीजीआईए प्राचार्य प्रोफेसर चंदन सिंह, प्रोफेसर अशोक कुमार शर्मा, प्रोफेसर पी.पी. शर्मा, प्रोफेसर मंदीप, प्रोफेसर अतुल सिंह तथा परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर राजाराम अग्रवाल सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ शिक्षाविद एवं सदस्य उपस्थित रहे।

 
 
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Author
Rajendra Harsh
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