राजस्थान बोर्ड में बड़ा बदलाव: 10वीं के विद्यार्थियों को अब साल में दो बार परीक्षा

जयपुर। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 10वीं बोर्ड परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए विद्यार्थियों को अब एक ही शैक्षणिक सत्र में दो बार परीक्षा देने का अवसर प्रदान करने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत मुख्य परीक्षा के बाद विद्यार्थियों के लिए दूसरी बोर्ड परीक्षा आयोजित की जाएगी, जिससे उन्हें अपने परिणाम में सुधार का मौका मिल सकेगा। नई व्यवस्था के अनुसार फरवरी माह में मुख्य बोर्ड परीक्षा आयोजित होगी। इसके तुरंत बाद दूसरी परीक्षा का आयोजन किया जाएगा


जयपुर। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 10वीं बोर्ड परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए विद्यार्थियों को अब एक ही शैक्षणिक सत्र में दो बार परीक्षा देने का अवसर प्रदान करने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत मुख्य परीक्षा के बाद विद्यार्थियों के लिए दूसरी बोर्ड परीक्षा आयोजित की जाएगी, जिससे उन्हें अपने परिणाम में सुधार का मौका मिल सकेगा।

नई व्यवस्था के अनुसार फरवरी माह में मुख्य बोर्ड परीक्षा आयोजित होगी। इसके तुरंत बाद दूसरी परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। इस प्रणाली के लागू होने के बाद अब पारंपरिक पूरक (सप्लीमेंट्री) परीक्षा व्यवस्था समाप्त कर दी जाएगी। यह मॉडल केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की तर्ज पर तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों पर परीक्षा संबंधी दबाव कम करना और उन्हें बेहतर प्रदर्शन का अतिरिक्त अवसर उपलब्ध कराना है।

बोर्ड अधिकारियों के अनुसार दूसरी परीक्षा केवल असफल विद्यार्थियों के लिए ही नहीं, बल्कि उन छात्रों के लिए भी उपयोगी होगी जो अपने प्राप्त अंकों में सुधार करना चाहते हैं। दोनों परीक्षाओं के लिए अलग-अलग अंक पत्र जारी किए जाएंगे, जिससे विद्यार्थियों को अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का लाभ मिल सकेगा।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यवस्था से विद्यार्थियों को एक परीक्षा में असफल होने पर पूरा वर्ष बर्बाद होने की चिंता नहीं रहेगी। इससे ड्रॉप आउट दर में कमी आने की संभावना है तथा छात्रों का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी इसका विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है।

राजस्थान बोर्ड का यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की भावना के अनुरूप माना जा रहा है, जिसमें परीक्षा प्रणाली को अधिक लचीला, छात्र-केंद्रित और तनावमुक्त बनाने पर जोर दिया गया है। शिक्षा विभाग का मानना है कि नई व्यवस्था विद्यार्थियों को अपनी क्षमता के अनुसार बेहतर प्रदर्शन करने का अवसर देगी और परीक्षा को केवल एक अवसर तक सीमित नहीं रखेगी।

इस बदलाव को राज्य की शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देखा जा रहा है, जिससे हजारों विद्यार्थियों को सीधे तौर पर लाभ मिलने की उम्मीद है।

 
 
 
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Author
Rajendra Harsh
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