हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति

  • Posted on 11 मार्च 2026
  • खास
  • By Rajendra Harsh
  • 50 Views

नई दिल्ली। करीब 12 वर्षों से कोमा में जीवन और मृत्यु के बीच जूझ रहे हरीश राणा के मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। मरीज की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए Supreme Court of India ने उन्हें निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी है। अदालत के आदेश के बाद उनके जीवन रक्षक उपकरण हटा दिए गए हैं और आगे का उपचार भी रोक दिया गया है।

 

WhatsApp Image 2026-03-11 at 8.44.19 PM-XS5IvLZMM3.jpeg

12 वर्षों से कोमा में रहे हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति, सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

नई दिल्ली। करीब 12 वर्षों से कोमा में जीवन और मृत्यु के बीच जूझ रहे हरीश राणा के मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। मरीज की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए Supreme Court of India ने उन्हें निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी है। अदालत के आदेश के बाद उनके जीवन रक्षक उपकरण हटा दिए गए हैं और आगे का उपचार भी रोक दिया गया है।

जानकारी के अनुसार हरीश राणा वर्ष 2013 में एक दुर्घटना का शिकार हो गए थे। वह एक इमारत की चौथी मंजिल से गिर गए थे, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई थी। दुर्घटना के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने के लिए लंबे समय तक इलाज किया। हालांकि चोट इतनी गंभीर थी कि वह गहरे कोमा में चले गए और तब से अब तक उनकी हालत में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ।

करीब 12 वर्षों तक अस्पताल में जीवन रक्षक उपकरणों के सहारे उनका उपचार जारी रहा। इस दौरान कई बार चिकित्सकीय परीक्षण भी किए गए, लेकिन डॉक्टरों का मानना था कि उनकी चेतना लौटने की संभावना बेहद कम है।

इसी स्थिति को देखते हुए उनके परिवार की ओर से अदालत में याचिका दायर कर निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी गई थी। अदालत में प्रस्तुत मेडिकल रिपोर्ट, डॉक्टरों की राय और मामले की परिस्थितियों पर विस्तृत सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मानवीय आधार पर यह अनुमति प्रदान की।

अदालत के आदेश के बाद अस्पताल प्रशासन ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत हरीश राणा के जीवन रक्षक उपकरण हटा दिए हैं। साथ ही उनका सक्रिय इलाज भी रोक दिया गया है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह मामला देश में इच्छामृत्यु से जुड़े संवेदनशील विषयों पर फिर से चर्चा का विषय बन गया है। सुप्रीम कोर्ट पहले भी कुछ मामलों में सख्त दिशा-निर्देशों के तहत निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दे चुका है, ताकि असाध्य बीमारी या लंबे समय तक कोमा में रहने वाले मरीजों के मामलों में मानवीय और कानूनी संतुलन बनाए रखा जा सके

0
Author
Rajendra Harsh
Author
Rajendra Harsh

Write a Response