महात्मा गांधी अस्पताल बना ‘बीमारियों का अड्डा’

जोधपुर। शहर के महात्मा गांधी अस्पताल में बदइंतजामी के हालात चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुके हैं। अस्पताल परिसर के रसोई किचन के पीछे कचरे का बड़ा ढेर जमा है, जिसमें सड़ते अवशेष और मरे हुए जानवरों के शव खुले में पड़े हैं। इससे उठने वाली तेज दुर्गंध वार्डों से लेकर सड़क तक फैल रही है, जिससे मरीजों, उनके परिजनों और स्टाफ को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

 

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महात्मा गांधी अस्पताल बना ‘बीमारियों का अड्डा’, कचरे की सड़ांध से मरीज बेहाल

जोधपुर। शहर के महात्मा गांधी अस्पताल में बदइंतजामी के हालात चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुके हैं। अस्पताल परिसर के रसोई किचन के पीछे कचरे का बड़ा ढेर जमा है, जिसमें सड़ते अवशेष और मरे हुए जानवरों के शव खुले में पड़े हैं। इससे उठने वाली तेज दुर्गंध वार्डों से लेकर सड़क तक फैल रही है, जिससे मरीजों, उनके परिजनों और स्टाफ को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

जहां एक ओर मरीज यहां बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें गंदगी और संक्रमण के खतरे का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि अस्पताल अब इलाज का केंद्र कम और बीमारियां फैलने का बड़ा स्रोत अधिक नजर आने लगा है। दुर्गंध और गंदगी के कारण मरीजों की हालत और बिगड़ने का खतरा भी बढ़ गया है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस गंभीर समस्या को लेकर जब जिम्मेदार अधिकारियों से सवाल किया गया, तो उन्होंने जवाबदेही लेने के बजाय लापरवाही भरा रवैया अपनाया। सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों ने सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए इसे सामान्य स्थिति बताने की कोशिश की।

कचरे के ढेर से उठ रही सड़ांध न केवल असहनीय है, बल्कि यह संक्रमण फैलने का बड़ा कारण भी बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में मरीजों के साथ-साथ अस्पताल स्टाफ के स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों ने प्रशासन से तत्काल सफाई व्यवस्था सुधारने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है या समय रहते हालात सुधारने के लिए कदम उठाएगा।

 
 
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Author
Rajendra Harsh
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