एमजीएच की इमरजेंसी पर सवाल: घायल मरीज 4 घंटे तक तड़पता रहा, वीडियो बनने के बाद मिला इलाज
जोधपुर। महात्मा गांधी अस्पताल (एमजीएच) की इमरजेंसी सेवाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल के बाहर एक घायल व्यक्ति करीब चार घंटे तक जमीन पर पड़ा तड़पता रहा, लेकिन उसे समय पर उपचार नहीं मिल सका। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दर्द और खून से लथपथ होने के बावजूद अस्पताल स्टाफ ने प्रारंभ में उसे गंभीरता से नहीं लिया।
बताया जा रहा है कि मौके पर मौजूद कुछ कर्मचारियों ने बिना प्राथमिक जांच किए ही घायल को नशे में होने की आशंका जताते हुए नजरअंदाज कर दिया। न तो उसकी नब्ज जांची गई और न ही चोट का आकलन किया गया। इस दौरान आसपास मौजूद लोग लगातार मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
घटना के दौरान अस्पताल के बाहर मौजूद लोगों में आक्रोश बढ़ता गया। करीब चार घंटे तक घायल व्यक्ति इमरजेंसी गेट के बाहर ही पड़ा रहा। हालात तब बदले जब एक महिला ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा करने की चेतावनी दी और अस्पताल प्रबंधन को फटकार लगाई।
वीडियो बनते ही अस्पताल प्रशासन हरकत में आया। तत्काल स्ट्रेचर की व्यवस्था की गई और घायल को अंदर ले जाकर इलाज शुरू किया गया। इस घटना ने अस्पताल की आपातकालीन सेवाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं में इमरजेंसी को सबसे प्राथमिक माना जाता है, जहां हर सेकंड महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में किसी घायल को घंटों तक बिना उपचार के छोड़ देना न केवल लापरवाही है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।
स्थानीय लोगों ने मामले की जांच कर जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोहराई न जाएं।
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