चिकित्सा शिक्षा में आधुनिक तकनीकों का समावेश समय की आवश्यकता
- Posted on 13 मार्च 2026
- सामान्य समाचार
- By Rajendra Harsh
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जोधपुर, 13 मार्च।
पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर के स्नातकोत्तर रचना शारीर विभाग के तत्वावधान में आयोजित “प्लास्टिकॉन–2026” दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार एवं हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ शुक्रवार को हुआ।
चिकित्सा शिक्षा में आधुनिक तकनीकों का समावेश समय की आवश्यकता – मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग प्लास्टिनेशन तकनीक से मानव अंगों को वर्षों तक सुरक्षित रखकर अध्ययन संभव – कुलगुरु प्रोफेसर (वैद्य) शुक्ल
जोधपुर, 13 मार्च।
पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर के स्नातकोत्तर रचना शारीर विभाग के तत्वावधान में आयोजित “प्लास्टिकॉन–2026” दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार एवं हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ शुक्रवार को हुआ।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में राजस्थान विधानसभा के मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि चिकित्सा शिक्षा में नई तकनीकों का समावेश समय की आवश्यकता है। प्लास्टिनेशन जैसी आधुनिक तकनीकें विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए शरीर रचना विज्ञान के अध्ययन को अधिक सुलभ, प्रभावी और व्यावहारिक बनाती हैं। उन्होंने इस प्रकार की कार्यशालाओं को चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. (वैद्य) गोविंद सहाय शुक्ल ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा में आधुनिक तकनीकों का समावेश अत्यंत आवश्यक है। प्लास्टिनेशन तकनीक शरीर रचना विज्ञान के अध्ययन को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है तथा इससे विद्यार्थियों को लंबे समय तक संरक्षित अंगों के माध्यम से अध्ययन का बेहतर अवसर मिलता है।
कार्यशाला में राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ डॉ. हरिकृष्णन पी.आर., डॉ. मिनीमोल, डॉ. अल्फांजो एवं डॉ. विष्णु कुमार रिसोर्स पर्सन के रूप में उपस्थित रहे और प्रतिभागियों को प्लास्टिनेशन तकनीक की सैद्धांतिक जानकारी के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान कर रहे हैं।
स्नातकोत्तर रचना शारीर विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. महेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि प्लास्टिनेशन मानव अंगों को संरक्षित रखने की अत्याधुनिक तकनीक है, जिसके माध्यम से शरीर के अंगों को लंबे समय तक सुरक्षित रखकर अध्ययन एवं शिक्षण में उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में लगभग 40 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं, जो राजस्थान के विभिन्न आयुर्वेदिक महाविद्यालयों से आए हैं। इसके साथ ही रचना शारीर विभाग के स्नातकोत्तर अध्येता भी इसमें सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को प्लास्टिनेशन की आधुनिक प्रक्रियाओं, कैडवर संरक्षण की नवीन तकनीकों तथा चिकित्सा शिक्षा में उनके उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है।
कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए रचना शारीर विभाग के समस्त संकाय सदस्यों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों का विशेष सहयोग रहा।
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