हेमलता रौतवार को मिली पीएचडी की उपाधि

जोधपुर। जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के राजनीति विज्ञान विभाग की शोधार्थी हेमलता रौतवार को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई है। उन्होंने “डॉ राम मनोहर लोहिया के राजनीतिक एवं सामाजिक विचारों की वर्तमान भारत में प्रासंगिकता: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन” विषय पर अपना शोध कार्य पूर्ण किया। यह शोध कार्य उन्होंने डॉ अनुपम चतुर्वेदी, एसोसिएट प्रोफेसर, राजकीय बांगड़ महाविद्यालय, पाली के निर्देशन में किया।

 

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हेमलता रौतवार को मिली पीएचडी की उपाधि

जोधपुर। जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के राजनीति विज्ञान विभाग की शोधार्थी हेमलता रौतवार को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई है। उन्होंने “डॉ राम मनोहर लोहिया के राजनीतिक एवं सामाजिक विचारों की वर्तमान भारत में प्रासंगिकता: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन” विषय पर अपना शोध कार्य पूर्ण किया। यह शोध कार्य उन्होंने डॉ अनुपम चतुर्वेदी, एसोसिएट प्रोफेसर, राजकीय बांगड़ महाविद्यालय, पाली के निर्देशन में किया।

हेमलता रौतवार की इस उपलब्धि से उनके परिवार, सहकर्मियों और शिक्षा जगत में खुशी की लहर है। शोध कार्य में उन्होंने डॉ राम मनोहर लोहिया के राजनीतिक और सामाजिक विचारों का गहन अध्ययन करते हुए यह विश्लेषण किया कि उनके सिद्धांत और विचार वर्तमान भारत की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों में किस प्रकार प्रासंगिक हैं। शोध में लोहिया के समाजवाद, समानता, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े विचारों का विस्तृत अध्ययन किया गया है।

शोध के दौरान हेमलता रौतवार ने ऐतिहासिक, सामाजिक और राजनीतिक संदर्भों का विश्लेषण करते हुए यह समझने का प्रयास किया कि लोहिया के विचार आज के लोकतांत्रिक भारत में किस प्रकार मार्गदर्शक सिद्ध हो सकते हैं। उनके अध्ययन में यह भी दर्शाया गया है कि समाज में व्याप्त असमानताओं को दूर करने, सामाजिक न्याय को मजबूत करने और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ बनाने में लोहिया के विचार आज भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

हेमलता रौतवार वर्तमान में रोहट स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय रोहट में व्याख्याता के पद पर कार्यरत हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उनकी सक्रियता और शोध के प्रति समर्पण को देखते हुए शिक्षाविदों ने इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

उनकी इस सफलता पर विश्वविद्यालय के शिक्षकों, शोधार्थियों और परिचितों ने उन्हें बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। शिक्षाविदों का मानना है कि इस प्रकार के शोध कार्य न केवल अकादमिक जगत को समृद्ध करते हैं, बल्कि समाज और राजनीति के समकालीन मुद्दों को समझने में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

इस उपलब्धि से यह भी स्पष्ट होता है कि शोध और शिक्षा के क्षेत्र में लगातार प्रयास करने वाले प्रतिभाशाली शोधार्थी समाज के बौद्धिक विकास में अहम भूमिका निभाते हैं।

 
 
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Author
Rajendra Harsh
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