G20 सैटेलाइट के साल 2027 में लॉन्च होने की उम्मीद

  • Posted on 19 अप्रैल 2026
  • खास
  • By Rajendra Harsh
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नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के चेयरमैन वी नारायणन ने शनिवार (18 अप्रैल 2026) को कहा कि बहुप्रतीक्षित G20 सैटेलाइट के वर्ष 2027 में लॉन्च होने की उम्मीद है। यह सैटेलाइट जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण और मौसम की सटीक निगरानी के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया जा रहा है, जिससे पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में वैश्विक स्तर पर मदद मिलेगी।

 


नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के चेयरमैन वी नारायणन ने शनिवार (18 अप्रैल 2026) को कहा कि बहुप्रतीक्षित G20 सैटेलाइट के वर्ष 2027 में लॉन्च होने की उम्मीद है। यह सैटेलाइट जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण और मौसम की सटीक निगरानी के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया जा रहा है, जिससे पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में वैश्विक स्तर पर मदद मिलेगी।

डॉ. नारायणन ‘इंजीनियरिंग स्टाफ कॉलेज ऑफ इंडिया’ में आयोजित कार्यक्रम में वैज्ञानिकों को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान कार्यक्रम में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), ISRO और एयरोनॉटिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के कई वरिष्ठ वैज्ञानिक और विशेषज्ञ उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि भारत अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में तेजी से नई ऊंचाइयों को छू रहा है और आने वाले वर्षों में देश की भूमिका और भी महत्वपूर्ण होने वाली है।

उन्होंने बताया कि प्रस्तावित G20 सैटेलाइट वैश्विक सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण होगा, जिसका उद्देश्य पृथ्वी के वातावरण से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़ों को एकत्र करना और उन्हें साझा करना है। इससे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का बेहतर आकलन किया जा सकेगा, साथ ही प्राकृतिक आपदाओं की पूर्व चेतावनी देने में भी सहायता मिलेगी।

अपने संबोधन में डॉ. नारायणन ने भारत की एक ऐतिहासिक उपलब्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का पहला देश है जिसने बिना किसी टक्कर के एक ही रॉकेट के जरिए 100 से अधिक उपग्रहों को अंतरिक्ष में स्थापित किया। यह उपलब्धि PSLV-C37 मिशन के तहत हासिल की गई थी, जिसमें कुल 104 सैटेलाइट्स को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया गया था।

उन्होंने वैज्ञानिकों से नवाचार और अनुसंधान पर जोर देने का आह्वान किया, ताकि भारत अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ता रहे। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित वैज्ञानिकों ने भी अपने विचार साझा किए और देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम को और मजबूत बनाने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई।

 
 
 
 
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