जोधपुर महानगर के अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या चार ने बच्चे के अपहरण एवं फिरौती के एक बहुचर्चित 10 साल पुराने मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी पांच आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश तरुण कुमार कुमावत ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रत्येक आरोपी पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
मामले में राजस्थान सरकार की ओर से पैरवी कर रहे अपर लोक अभियोजक दशरथ सिंह राजपुरोहित ने बताया कि प्रॉपर्टी कारोबारी सियाराम ने 12 मार्च 2016 को अपने बेटे भूपेंद्र के अपहरण का मामला पुलिस थाना बनाड़ में दर्ज करवाया था। घटना के अनुसार, भूपेंद्र घर के बाहर गली में खेल रहा था, तभी सफेद रंग की स्विफ्ट कार में आए बदमाशों ने उसे जबरन उठाकर कार में डाल लिया और फरार हो गए।
अपहरण के कुछ ही समय बाद सियाराम के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया, जिसमें आरोपियों ने डेढ़ करोड़ रुपये की फिरौती मांगी और पुलिस को सूचना देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। इस घटना से परिवार और क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया।
घटना के तीन दिन बाद, 15 मार्च 2016 को भूपेंद्र बावड़ी स्थित एक होटल के पास सुरक्षित मिला। बच्चे ने स्वयं अपनी मां को फोन कर अपनी लोकेशन बताई, जिसके बाद परिजन मौके पर पहुंचे और उसे सुरक्षित घर लाया गया। मामले की जांच तत्कालीन उप निरीक्षक कमलदान चारण ने की और पारिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया।
न्यायालय में कुल 32 गवाहों के बयान और 84 दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ अपराध को संदेह से परे सिद्ध मानते हुए जितेंद्र सिंह, नटवर सिंह, रिड़मल सिंह, लोकेश सारण और राजू सिंह उर्फ राजेंद्र सिंह को दोषी ठहराया। इस फैसले के साथ ही न्यायालय ने गंभीर अपराधों के प्रति सख्त संदेश दिया है।
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