कार्डियोथोरेसिक विभाग में एंडोवस्कुलर तकनीक
- Posted on 13 अप्रैल 2026
- सामान्य समाचार
- By Rajendra Harsh
- 62 Views
मथुरा दास माथुर अस्पताल के कार्डियोथोरेसिक विभाग में एंडोवस्कुलर तकनीक- टावी( ट्रांस कैथेटर ऑर्टिक वाल्व इंप्लांटेशन/ रिप्लेसमेंट )के माध्यम से राजस्थान में पहली बार कार्डियो थोरेसिक सर्जनों की टीम ने गर्दन की महाधमनी केरॉटिड आर्टरी के रास्ते मरीज के हृदय के सिकुड़े हुए ऑर्टिक वाल्व से निजात दिलाई ।
मथुरा दास माथुर अस्पताल के कार्डियोथोरेसिक विभाग में एंडोवस्कुलर तकनीक- टावी( ट्रांस कैथेटर ऑर्टिक वाल्व इंप्लांटेशन/ रिप्लेसमेंट )के माध्यम से राजस्थान में पहली बार कार्डियो थोरेसिक सर्जनों की टीम ने गर्दन की महाधमनी केरॉटिड आर्टरी के रास्ते मरीज के हृदय के सिकुड़े हुए ऑर्टिक वाल्व से निजात दिलाई ।
डॉ सुभाष बलारा (सीटीवीएस विभागअध्यक्ष) ने बताया कि ६३ वर्षीय शिवपुरा, खिंमसर निवासी मोहनी देवी गत दो वर्षों से सीने में दर्द ,सांस फूलने तथा हृदय गति की अनियमिता से पीड़ित थी। जांचों (ईको कार्डियोग्राफी तथा सिटी ऑटोग्राम )के उपरांत यह पता चला कि उनके हृदय के ऑर्टिक वाल्व में काफी सिकुड़न( सिवियर अयोर्टिक स्टेनोसिस )है और यह खराब हो चुका है । अतः परिजनों की सहमति ,मरीज की बीमारी, उम्र तथा कोमौरबिड इलनेसेस को देखते हुए मरीज को टावी प्रोसीजर करने का निर्णय लिया गया। इस प्रोसीजर में मरीज के गर्दन की महाधमनी कैरोटिड आर्टरी के रास्ते इंट्री करके टावी तकनीक से खराब अयोरटिक वालव को नए वालव से रिप्लेस किया गया ।
यह संभवत संपूर्ण राजस्थान में पहला टावी प्रोसीजर है जो की गर्दन की महाधमनी के रास्ते सफलतापूर्वक किया गया।
डॉ विकास राजपुरोहित ने बताया कि यह ऑपरेशन इसलिए भी विशेष है क्योंकि गरदन की महा धमनी ही खून को दिमाग तक ले जाने का काम करती है इसलिए इस ऑपरेशन में एनेस्थीसिया विभाग के डॉक्टरों द्वारा सेरेब्रल ऑक्सीमीटर के सर्विलांस में इस प्रोसीजर को किया गया जिससे मरीज को न्यूरोवस्कुलर कॉम्प्लिकेशन (जैसे कि लकवा, दिमाग में खून का थक्का जमना या ब्लीडिंग )से बचाया जा सकता है तथा उसकी पहले ही रोकथाम की जा सकती है।
पहले इस ऑपरेशन की प्रणाली के लिए मरीजों को अन्य राज्यों तथा मेट्रो शहरों में जाना पड़ता था जहां इलाज का खर्चा लगभग 20 लाख रुपए तक आता है, परंतु यह इलाज अब मथुरादास माथुर अस्पताल में राजस्थान सरकार की आर. जी.एच.एस. स्कीम के अंतर्गत निशुल्क प्रधान किया गया।
Write a Response