कान्स फिल्म फेस्टिवल के रेड कार्पेट पर पहुंची डॉ. सोनल परिहार

फ्रांस में आयोजित प्रतिष्ठित Cannes Film Festival के रेड कार्पेट पर इस बार जोधपुर की प्रसिद्ध स्त्री रोग विशेषज्ञ, फैशन आइकन और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर Dr. Sonal Parihar ने अपनी खास मौजूदगी दर्ज कराई। ऑपरेशन थिएटर से लेकर अंतरराष्ट्रीय फैशन मंच तक का उनका सफर अब जोधपुर और राजस्थान के लिए प्रेरणा का विषय बन गया है। मेडिकल प्रोफेशन से जुड़ी डॉ. सोनल परिहार ने अपनी पहचान केवल एक डॉक्टर के रूप में ही नहीं बनाई, बल्कि फैशन, मोटिवेशन और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी मजबूत छाप छोड़ी है।

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फ्रांस में आयोजित प्रतिष्ठित Cannes Film Festival के रेड कार्पेट पर इस बार जोधपुर की प्रसिद्ध स्त्री रोग विशेषज्ञ, फैशन आइकन और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर Dr. Sonal Parihar ने अपनी खास मौजूदगी दर्ज कराई। ऑपरेशन थिएटर से लेकर अंतरराष्ट्रीय फैशन मंच तक का उनका सफर अब जोधपुर और राजस्थान के लिए प्रेरणा का विषय बन गया है।

मेडिकल प्रोफेशन से जुड़ी डॉ. सोनल परिहार ने अपनी पहचान केवल एक डॉक्टर के रूप में ही नहीं बनाई, बल्कि फैशन, मोटिवेशन और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी मजबूत छाप छोड़ी है। मिसेज इंडिया और कई अंतरराष्ट्रीय ब्यूटी प्लेटफॉर्म्स पर सफलता हासिल करने के बाद उन्होंने कान्स फिल्म फेस्टिवल 2026 में भारत और राजस्थान का प्रतिनिधित्व किया।

कान्स के रेड कार्पेट पर डॉ. सोनल के परिधानों में राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत और ग्लोबल फैशन का अनूठा संगम देखने को मिला। दो दिवसीय इवेंट के दौरान उन्होंने अलग-अलग लुक्स के जरिए भारतीय शिल्पकला, परंपरा और स्त्री शक्ति को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

उनका पहला परिधान डिजाइनर प्राशिक पुष्पलता सुखनंदन और इनीत रांधावा द्वारा तैयार किया गया था, जिसमें अनुपयोगी हो चुकी कढ़ाई मशीनों के हिस्सों का उपयोग किया गया। इस विशेष ड्रेस ने पारंपरिक हस्तकला और मशीन आधारित फैशन के बीच के संघर्ष को दर्शाया। परिधान के साथ लगाए गए लकड़ी के कंधे के घेरे भारतीय कढ़ाई फ्रेम से प्रेरित थे, जिन्होंने देश के कारीगरों की सदियों पुरानी कला को वैश्विक मंच पर सम्मान दिलाया।

रेड कार्पेट पर उनका दूसरा लुक भारत की प्राकृतिक सुंदरता से प्रेरित था। भारी हाथ की कढ़ाई से सजी इस ड्रेस में खिलते बगीचों, बहती नदियों और प्रकृति की खूबसूरती को उकेरा गया। वहीं सिर पर सजे विशेष आभूषणों में बने देवदूत मातृत्व और उनके स्त्री रोग विशेषज्ञ होने के भाव को दर्शा रहे थे।

डॉ. सोनल का तीसरा लुक पूरी तरह राजस्थान की संस्कृति को समर्पित रहा। पारंपरिक राजस्थानी साड़ी और आभूषणों के साथ उन्होंने 400 वर्ष पुरानी दुर्लभ “डंका वर्क” कला को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया। डिजाइनर Neetu Singh के “मीना डंका” संग्रह ने पारंपरिक शिल्पकला को आधुनिक फैशन से जोड़ते हुए खास पहचान दिलाई।

डॉ. सोनल ने कहा कि यह सफर केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो अपने पेशे के साथ सपनों को भी पूरा करना चाहती हैं।

 
 
 
 
 
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Author
Rajendra Harsh
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