अकाल-सुकाल और जमाने की ‘धणी’

जोधपुर। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर शहर के घाँची समाज द्वारा आयोजित ‘धणी’ अनुष्ठान एक बार फिर चर्चा का केंद्र रहा। बीते 300 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के तहत समाज के लोग आगामी वर्ष में अकाल-सुकाल, समय की स्थिति, बीमारी और सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों के संकेत प्राप्त करने के लिए यह विशेष धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

 

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जोधपुर। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर शहर के घाँची समाज द्वारा आयोजित ‘धणी’ अनुष्ठान एक बार फिर चर्चा का केंद्र रहा। बीते 300 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के तहत समाज के लोग आगामी वर्ष में अकाल-सुकाल, समय की स्थिति, बीमारी और सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों के संकेत प्राप्त करने के लिए यह विशेष धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।

सोजतिया बास घाँची समाज विकास समिति के तत्वावधान में रविवार, 19 अप्रैल 2026 को स्थानीय घाँची समाज बगेची, बाई जी का तालाब पर दोपहर 1 बजे से 5 बजे तक इस अनुष्ठान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विधि-विधान से हवन-यज्ञ किया गया, जिसमें विशेष परंपरा के अनुसार दो बालकों को खपच्ची लेकर खड़ा रखा गया और उन्हें 9 बार बदला गया। इस धार्मिक प्रक्रिया का नेतृत्व मुख्य जागेश्वर जी महाराज ने किया, जबकि सहयोग के लिए भागवत नंदन सचिन महाराज भी उपस्थित रहे।

समिति के उपाध्यक्ष मगराज भाटी ने बताया कि ‘धणी’ अनुष्ठान के माध्यम से व्यक्त की जाने वाली संभावनाएं वर्षों से काफी हद तक सटीक साबित होती रही हैं, जिससे समाज में इस परंपरा के प्रति गहरा विश्वास बना हुआ है। समिति अध्यक्ष गंगाराम सोलंकी ने जानकारी दी कि इस वर्ष के अनुष्ठान में संकेत मिले हैं कि आने वाले समय में अकाल और सुकाल की स्थिति संतुलित रहने की संभावना है।

कार्यक्रम में समाज के अनेक गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे, जिनमें राजेंद्र कुमार सोलंकी (अध्यक्ष, घाँची महासभा), राजेंद्र भेरावत (पूर्व महासचिव), पार्षद अशोक भाटी, अचलूराम सोलंकी (कोषाध्यक्ष), श्रीकिशन भाटी, राजेश सोलंकी, जेठाराम भाटी, श्यामसैनजी, धनराज बोराणा, रमेश सोलंकी, कैलाश परिहार, मोहनलाल भाटी, शशि कुमार सोलंकी, गौरीशंकर बोराणा सहित कई अन्य सदस्य शामिल रहे।

समिति सचिव कमलेश भाटी ने सभी उपस्थितजनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन समाज की एकता और परंपराओं को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के दौरान धार्मिक आस्था और सामाजिक सहभागिता का सुंदर संगम देखने को मिला।

 
 
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Author
Rajendra Harsh
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