जोधपुर। चौहाबोर्ड थाना पुलिस की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से एक बड़ी साइबर ठगी की वारदात नाकाम कर दी गई। पुलिस ने समय रहते हस्तक्षेप करते हुए पीड़ित के खाते से निकाली गई ₹1.85 लाख की राशि वापस दिलवाई, जिससे एक बड़ा आर्थिक नुकसान टल गया।
मामले के अनुसार, चौहाबोर्ड निवासी जयकिशन चौहान ने 2 मई 2026 को थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई। उन्होंने बताया कि उनके पास आरबीएल बैंक का क्रेडिट कार्ड है, जिसकी लिमिट ₹1.90 लाख है। 1 मई को उन्होंने अपने कार्ड का बिल भुगतान किया, जिसके कुछ समय बाद रात 11:41 बजे उनके खाते से ₹1,85,634 कटने का मैसेज मिला। जबकि उन्होंने किसी के साथ कोई ओटीपी साझा नहीं किया था। इस पर उन्होंने तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर भी शिकायत दर्ज करवाई।
पुलिस आयुक्त शरत कविराज और पुलिस उपायुक्त कमल शेखावत के निर्देशन में तथा अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त नीरज शर्मा और वृत्त प्रतापनगर के सुपरविजन में चौहाबोर्ड थाना अधिकारी ईश्वरचंद्र पारीक के नेतृत्व में मामले की जांच शुरू की गई। जांच के दौरान साइबर एक्सपर्ट दिनेश पटेल ने तकनीकी विश्लेषण करते हुए खुलासा किया कि पीड़ित के पास कुछ दिन पहले एक कॉल आया था, जिसमें इण्डसइंड बैंक के नाम पर क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने का झांसा देकर एक फर्जी APK फाइल भेजी गई थी।
पीड़ित द्वारा वह फाइल मोबाइल में इंस्टॉल करते ही ठग को उसके फोन का रिमोट एक्सेस मिल गया। इसके बाद ठग ने मौके का फायदा उठाकर मोबिक्विक वॉलेट में लॉगइन कर ₹1,85,634 ट्रांसफर कर लिए। जैसे ही पीड़ित ने थाने में रिपोर्ट दी, साइबर टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए फर्जी एप की पहचान कर उसे अनइंस्टॉल किया और ठग का एक्सेस खत्म कर दिया। साथ ही मोबिक्विक वॉलेट को लॉगआउट कर ट्रांजेक्शन को आगे बढ़ने से रोक दिया गया और पूरी राशि सुरक्षित वापस पीड़ित के खाते में ट्रांसफर कर दी गई।
पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी अज्ञात व्यक्ति द्वारा भेजी गई APK फाइल को इंस्टॉल न करें। ऐसी फाइलें आपके मोबाइल और बैंकिंग डाटा को खतरे में डाल सकती हैं। किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन, साइबर क्राइम पोर्टल या नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराएं।
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