विवाहित जोड़े के तलाक तक पहुचे मामले को समझाईस कर सुलझाया

जोधपुर। पुलिस थाना महिला पश्चिम जिला जोधपुर द्वारा एक सराहनीय पहल करते हुए तलाक तक पहुंच चुके विवाहित जोड़े के मामले को समझाइश और काउंसलिंग के जरिए सुलझाकर उन्हें पुनः साथ रहने के लिए प्रेरित किया गया।

 

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महिला थाना पश्चिम की अनूठी पहल, तलाक तक पहुंचे दंपती को समझाइश से फिर मिलाया

जोधपुर। पुलिस थाना महिला पश्चिम जिला जोधपुर द्वारा एक सराहनीय पहल करते हुए तलाक तक पहुंच चुके विवाहित जोड़े के मामले को समझाइश और काउंसलिंग के जरिए सुलझाकर उन्हें पुनः साथ रहने के लिए प्रेरित किया गया।

यह कार्रवाई पुलिस आयुक्त शरत कविराज, पुलिस उपायुक्त पश्चिम विनीत कुमार बंसल के निर्देशानुसार तथा अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त महिला अपराध एवं अनुसंधान सेल पश्चिम निरज शर्मा के सुपरविजन में की गई। थाना प्रभारी रेणू ठाकुर के नेतृत्व में टीम ने इस संवेदनशील मामले में सकारात्मक हस्तक्षेप कर परिवार को टूटने से बचाया।

मामले के अनुसार 17 जनवरी 2026 को प्रार्थीया कविता (21), पत्नी सुनील, निवासी पीहर न्यू हाईकोर्ट के पीछे, जोधपुर एवं ससुराल गांव निम्बोल, तहसील जैतारण जिला पाली ने महिला थाना पश्चिम में परिवाद प्रस्तुत किया। उसने आरोप लगाया कि उसका पति एवं ससुराल पक्ष उसे परेशान करते हैं, जिसके चलते वह ससुराल में नहीं रहना चाहती और तलाक के लिए कोर्ट में आवेदन करने का निर्णय ले चुकी है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने बुलाकर समझाइश की प्रक्रिया शुरू की। इस दौरान पांच बार काउंसलिंग सत्र आयोजित किए गए, जिनमें पति-पत्नी के बीच उत्पन्न गलतफहमियों को दूर करने का प्रयास किया गया। जांच में सामने आया कि घरेलू छोटी-छोटी बातों को लेकर विवाद बढ़ गया था, जिससे रिश्ते में दूरियां आ गई थीं।

काउंसलिंग के दौरान पुलिस टीम ने दोनों पक्षों को धैर्यपूर्वक सुना और उन्हें आपसी समझ एवं संवाद के महत्व के बारे में बताया। लगातार प्रयासों के बाद दोनों के बीच बनी गलतफहमियां दूर हुईं और वे पुनः साथ रहने के लिए सहमत हो गए।

समझौते के बाद थाना परिसर में ही दोनों को वरमाला पहनाकर नए सिरे से जीवन की शुरुआत करने का संदेश दिया गया। इसके बाद प्रार्थीया को उसके पति के साथ ससुराल गांव निम्बोल, जैतारण के लिए रवाना किया गया।

इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी रेणू ठाकुर सहित पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस की इस पहल को सामाजिक दृष्टि से एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, जिसने एक परिवार को टूटने से बचाने में अहम भूमिका निभाई।

 
 
 
 
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Author
Rajendra Harsh
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