खवासपुरा के ग्राम विकास अधिकारी पर 10 हजार का जुर्माना

जोधपुर/जयपुर। सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराने और राज्य सूचना आयोग के आदेशों की अनदेखी करना ग्राम पंचायत खवासपुरा के तत्कालीन राज्य लोक सूचना अधिकारी एवं ग्राम विकास अधिकारी धर्माराम को भारी पड़ गया। राजस्थान राज्य सूचना आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए उन पर 10 हजार रुपए की शास्ति अधिरोपित की है। साथ ही आरटीआई की प्रक्रिया में परिवादी को हुई आर्थिक व मानसिक परेशानी के लिए 3 हजार रुपए क्षतिपूर्ति देने के आदेश दिए हैं।


जोधपुर/जयपुर। सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराने और राज्य सूचना आयोग के आदेशों की अनदेखी करना ग्राम पंचायत खवासपुरा के तत्कालीन राज्य लोक सूचना अधिकारी एवं ग्राम विकास अधिकारी धर्माराम को भारी पड़ गया। राजस्थान राज्य सूचना आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए उन पर 10 हजार रुपए की शास्ति अधिरोपित की है। साथ ही आरटीआई की प्रक्रिया में परिवादी को हुई आर्थिक व मानसिक परेशानी के लिए 3 हजार रुपए क्षतिपूर्ति देने के आदेश दिए हैं।

प्राप्त विवरण के अनुसार, खवासपुरा निवासी महीपाल ने 10 अक्टूबर 2025 को आरटीआई आवेदन प्रस्तुत कर ग्राम पंचायत खवासपुरा की 1 जनवरी 2021 से 10 अक्टूबर 2025 तक की कैशबुक की प्रमाणित प्रतियां मांगी थीं। निर्धारित अवधि में सूचना नहीं मिलने और प्रथम अपील का निस्तारण नहीं होने पर परिवादी ने राज्य सूचना आयोग के समक्ष द्वितीय अपील दायर की।

आयोग ने 8 अप्रैल 2026 को आदेश जारी कर लोक सूचना अधिकारी को 30 दिन के भीतर वित्तीय वर्ष 2023-24 की कैशबुक की प्रमाणित प्रति नि:शुल्क पंजीकृत डाक से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। आरोप है कि इसके बावजूद अधिकारी ने आयोग के आदेश की पालना नहीं की।

मामले में परिवादी ने दोबारा आयोग का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान वीडीओ ने यह तर्क दिया कि आवेदक रिकॉर्ड देखने के लिए उपस्थित नहीं हुआ। वहीं, परिवादी ने आयोग को बताया कि वह लगभग प्रतिदिन पंचायत कार्यालय जाता रहा, लेकिन उसे सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। आयोग की ओर से 29 मई और 6 अगस्त 2026 को जारी कारण बताओ नोटिस का भी वीडीओ ने जवाब नहीं दिया।

मामले की सुनवाई राज्य सूचना आयुक्त महेन्द्र कुमार पारख ने की। पत्रावली के अवलोकन के बाद आयोग ने अधिकारी के रवैये को आरटीआई कानून के प्रति असंवेदनशील, उदासीन और लापरवाह माना।

आयोग ने आरटीआई अधिनियम की धारा 20(1) के तहत 10 हजार रुपए की शास्ति लगाने के निर्देश दिए हैं। यह राशि अधिकारी के वेतन से काटकर 15 दिन में आयोग सचिव, जयपुर को भेजी जाएगी। साथ ही जुर्माने और लापरवाही की प्रविष्टि सेवापुस्तिका में दर्ज करने तथा धारा 20(2) के तहत विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा धारा 19(8)(B) के तहत परिवादी महीपाल को 3 हजार रुपए क्षतिपूर्ति देने के आदेश दिए गए हैं। आयोग ने जिला परिषद, जोधपुर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को आदेश की पालना सुनिश्चित कर समयबद्ध कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं।

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Author
Rajendra Harsh
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