जोधपुर। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में लागू आईएचएमएस (IHMS) सर्वर की तकनीकी समस्या एक बार फिर मरीजों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। मंगलवार सुबह ओपीडी शुरू होते ही सर्वर की रफ्तार धीमी पड़ गई, जिससे अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं। इसका असर राजधानी जयपुर के सबसे बड़े सवाई मान सिंह (SMS) अस्पताल सहित प्रदेशभर के कई अस्पतालों में देखने को मिला।
जोधपुर संभाग के सबसे बड़े मथुरा दास माथुर (MDM) अस्पताल में भी हालात चिंताजनक नजर आए। सर्वर की धीमी गति के कारण अस्पताल परिसर में मरीजों और उनके परिजनों की लंबी कतारें लग गईं। पर्ची कटवाने से लेकर जांच और भर्ती जैसी सेवाएं बाधित होने से मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
अस्पताल पहुंचे मरीजों ने बताया कि वे सुबह जल्दी इलाज की उम्मीद लेकर आए थे, लेकिन दो-दो घंटे इंतजार करने के बावजूद उनका नंबर नहीं आ पाया। कई मरीजों को पर्ची कटवाने के लिए काउंटर के बाहर लंबा इंतजार करना पड़ा, वहीं कई मरीज बिना इलाज के ही वापस लौटने को मजबूर हुए।
सर्वर डाउन होने के कारण ओपीडी में पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई। इसके अलावा लैब जांच, दवा वितरण और अन्य जरूरी सेवाएं भी प्रभावित रहीं। डॉक्टरों और स्टाफ को भी परेशानी का सामना करना पड़ा, क्योंकि मरीजों का डेटा सिस्टम में अपडेट नहीं हो पा रहा था।
दूरदराज क्षेत्रों से आए मरीजों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब रही। कई मरीज अपने परिजनों के साथ घंटों तक अस्पताल परिसर में इधर-उधर भटकते नजर आए। मरीजों ने आरोप लगाया कि बार-बार ऐसी तकनीकी दिक्कतों के बावजूद स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है, जिससे हर बार उन्हें परेशानी उठानी पड़ती है।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि सर्वर में आई तकनीकी समस्या को दूर करने के प्रयास जारी हैं और आईटी टीम को तुरंत सूचित कर दिया गया है। हालांकि, जब तक सर्वर पूरी तरह सामान्य नहीं होता, तब तक मरीजों को राहत मिलना मुश्किल है।
बार-बार सर्वर की समस्या से स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ रहे हैं। मरीजों और उनके परिजनों ने मांग की है कि सरकार इस समस्या का स्थायी समाधान करे, ताकि भविष्य में उन्हें इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े।
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