रोज़गार पर संकट, संस्कृति पर प्रहार
- Posted on 5 जनवरी 2026
- जोधपुर
- By Rajendra Harsh
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जोधपुर। शहर में बड़ी औद्योगिक इकाइयों द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण के नाम पर कार्रवाई की आड़ में प्रशासन द्वारा पारंपरिक रंगाई-छपाई का कार्य करने वाले कमजोर हस्तशिल्पी मजदूरों पर गाज गिराए जाने के विरोध में आज जोरदार आवाज़ उठी।
जोधपुर। शहर में बड़ी औद्योगिक इकाइयों द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण के नाम पर कार्रवाई की आड़ में प्रशासन द्वारा पारंपरिक रंगाई-छपाई का कार्य करने वाले कमजोर हस्तशिल्पी मजदूरों पर गाज गिराए जाने के विरोध में आज जोरदार आवाज़ उठी। देहात युवा कांग्रेस के बैनर तले रंगरेज समाज के सैकड़ों कारीगरों ने पैदल मार्च निकालकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
रंगरेज समाज का कहना है कि वे किसी भी तरह की बड़ी औद्योगिक इकाई नहीं हैं। वर्षों से छोटे-छोटे परिसरों में, बिना किसी औद्योगिक मशीनों के, केवल घरेलू बर्तनों और सीमित संसाधनों से अपने हाथ के हुनर द्वारा पारंपरिक रंगाई-छपाई का कार्य कर रहे हैं। यही कारीगर मारवाड़ की पारंपरिक पोशाकों और परिधानों को विशिष्ट रंगों से पहचान दिलाते हुए राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखे हुए हैं।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि नगर निगम जोधपुर और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा विभिन्न नियमों, कानूनों और न्यायिक आदेशों की गलत व्याख्या कर इन कारीगरों का रोजगार जबरन बंद करवाया जा रहा है। इसके चलते हस्तशिल्पी समाज के हजारों परिवारों की आजीविका का एकमात्र साधन छिनने की कगार पर है।
मार्च के दौरान वक्ताओं ने कहा कि बड़े उद्योगों से होने वाले प्रदूषण और पारंपरिक हस्तशिल्प कार्यों को एक ही तराजू में तौलना अन्याय है। यदि प्रशासन ने जल्द समाधान नहीं निकाला तो यह केवल रोजगार का नहीं, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान के समाप्त होने का भी कारण बनेगा।
रंगरेज समाज और देहात युवा कांग्रेस ने कलेक्टर से मांग की कि हस्तशिल्पी कारीगरों को राहत दी जाए, नियमों में व्यवहारिक संशोधन किया जाए और उनके पारंपरिक रोजगार को संरक्षण प्रदान किया जाए, ताकि हजारों परिवारों की रोजी-रोटी और मारवाड़ की सांस्कृतिक धरोहर सुरक्षित रह सके।
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