सरदारपुरा में घुड़ला महोत्सव की धूम

जोधपुर शहर में गणगौर पर्व को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। सरदारपुरा क्षेत्र में विभिन्न महिला मंडलों द्वारा घुड़ला कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें महिलाएं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। विशेष रूप से नेहरू पार्क महिला मंडल द्वारा आयोजित घुड़ला महोत्सव क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

 

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सरदारपुरा में घुड़ला महोत्सव की धूम, गणगौर पर्व पर महिलाओं में उत्साह

जोधपुर शहर में गणगौर पर्व को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। सरदारपुरा क्षेत्र में विभिन्न महिला मंडलों द्वारा घुड़ला कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें महिलाएं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। विशेष रूप से नेहरू पार्क महिला मंडल द्वारा आयोजित घुड़ला महोत्सव क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

महोत्सव के तहत महिलाएं प्रतिदिन एकत्रित होकर गणगौर पूजन करती हैं, मंगल गीत गाती हैं और घुड़ला लेकर घर-घर घूमती हैं। पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाएं लोकगीतों के माध्यम से अपनी आस्था और संस्कृति का प्रदर्शन कर रही हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सवी माहौल बना हुआ है।

मंडल की प्रमुख विद्या सोतवाल ने बताया कि 16 दिवसीय गणगौर पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दौरान महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती के रूप में गणगौर की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि और पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। उन्होंने बताया कि यह पर्व सनातन संस्कृति की महत्वपूर्ण परंपरा का हिस्सा है, जिसे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है।

उन्होंने यह भी बताया कि घुड़ला महोत्सव सात दिनों तक चलता है, जो महिला शक्ति, आत्मविश्वास और निर्भीकता का प्रतीक है। यह आयोजन महिलाओं को आत्मरक्षा और सामाजिक रूप से सशक्त बनने का संदेश भी देता है। महोत्सव के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं, जिससे महिलाओं में उत्साह और सहभागिता बनी हुई है।

कार्यक्रम में मंडल की सदस्य किरण माल, संजू तिलायचा, संतोष, डिम्पल चांदोरा, अंजू सौतवाल, ज्योति सोतवाल, कमल और पदमा सहित कई महिलाओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। साथ ही राजस्थान पुलिस की कालिका टीम की सदस्य एसआई प्राची गुर्जर भी अपनी टीम के साथ उपस्थित रहीं और महिलाओं को सुरक्षा व जागरूकता का संदेश दिया।

इस तरह के आयोजनों से न केवल पारंपरिक संस्कृति को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि समाज में महिला सशक्तिकरण और एकता की भावना भी मजबूत हो रही है।

 
 
 
 
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Author
Rajendra Harsh
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