काजरी में ‘खजूर दिवस’ आयोजित

जोधपुर। भाकृअनुप-केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) में मंगलवार को ‘खजूर दिवस’ का भव्य आयोजन किया गया। संस्थान के खजूर ब्लॉक में आयोजित इस कार्यक्रम में पश्चिमी राजस्थान के बड़ी संख्या में किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को खजूर की उन्नत खेती, नई किस्मों तथा आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी प्रदान करना रहा।

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जोधपुर। भाकृअनुप-केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) में मंगलवार को ‘खजूर दिवस’ का भव्य आयोजन किया गया। संस्थान के खजूर ब्लॉक में आयोजित इस कार्यक्रम में पश्चिमी राजस्थान के बड़ी संख्या में किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को खजूर की उन्नत खेती, नई किस्मों तथा आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी प्रदान करना रहा।

इस अवसर पर काजरी के निदेशक डॉ. हनुमान सहाय जाट ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों में शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए बागवानी आधारित कृषि प्रणाली सबसे अधिक लाभकारी विकल्प बनकर उभर रही है। उन्होंने कहा कि किसान यदि वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर खजूर जैसी नकदी फसलों की खेती करें तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। उन्होंने किसानों को आधुनिक तकनीकों और अनुसंधान आधारित कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के दौरान जोधपुर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने भी खजूर ब्लॉक का दौरा किया और संस्थान में चल रहे अनुसंधान कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि काजरी द्वारा विकसित तकनीकें किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही हैं और इससे क्षेत्र में कृषि विकास को नई दिशा मिल रही है।

काजरी के प्रभाग-द्वितीय के अध्यक्ष डॉ. धीरज सिंह ने किसानों को खजूर की उन्नत किस्मों की जानकारी देते हुए विशेष रूप से ‘एडीपी-1’ किस्म की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह किस्म मानसून शुरू होने से पहले ही पककर तैयार हो जाती है, जिससे फलों को बारिश से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है। इसके साथ ही इस किस्म के फल बेहतर गुणवत्ता वाले होते हैं और बाजार में अच्छी कीमत प्राप्त करते हैं।

डॉ. सिंह ने किसानों को भरपूर उत्पादन के लिए कृत्रिम परागण (पॉलिनेशन) की तकनीक अपनाने की सलाह दी। कार्यक्रम के अंतिम सत्र में वैज्ञानिकों ने खजूर के प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खजूर से विभिन्न उत्पाद तैयार कर किसान अपनी आय में और अधिक वृद्धि कर सकते हैं।

कार्यक्रम में संयुक्त निदेशक (कृषि) सत्यनारायण गढ़वाल, उप निदेशक (उद्यानिकी) रूपेश लावा सहित काजरी के वैज्ञानिक, अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

 
 
 
 
 
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Author
Rajendra Harsh
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