आसाराम की उम्रकैद की सजा बरकरार

जोधपुर। बहुचर्चित दुष्कर्म मामले में अदालत ने स्वयंभू धर्मगुरु Asaram को दी गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। हालांकि अदालत ने मामले में लगाए गए गैंगरेप के आरोप को निरस्त करते हुए संबंधित धारा हटा दी है। इसके साथ ही मामले में सह आरोपी संचिता, शिल्पी और शरतचंद्र को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया।

 

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जोधपुर। बहुचर्चित दुष्कर्म मामले में अदालत ने स्वयंभू धर्मगुरु Asaram को दी गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। हालांकि अदालत ने मामले में लगाए गए गैंगरेप के आरोप को निरस्त करते हुए संबंधित धारा हटा दी है। इसके साथ ही मामले में सह आरोपी संचिता, शिल्पी और शरतचंद्र को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया।

अदालत के फैसले के बाद कानूनी और सामाजिक हलकों में मामले को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान और जांच एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों का विस्तृत अध्ययन किया। अदालत ने माना कि मुख्य आरोपी आसाराम के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों के पर्याप्त आधार मौजूद हैं, जिसके चलते उनकी उम्रकैद की सजा को यथावत रखा गया है।

हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि सामूहिक दुष्कर्म यानी गैंगरेप से संबंधित आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसी आधार पर गैंगरेप की धारा को हटाते हुए सह आरोपियों को संदेह का लाभ दिया गया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष सह आरोपियों की संलिप्तता को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं हो पाया।

फैसले के बाद अदालत परिसर और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन सतर्क नजर आया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला मामले के विभिन्न पहलुओं को स्पष्ट करता है, जिसमें मुख्य आरोपी की जिम्मेदारी को बरकरार रखते हुए अन्य आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त प्रमाण नहीं मिलने पर उन्हें राहत दी गई।

गौरतलब है कि यह मामला लंबे समय से देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ था और पीड़िता की ओर से न्याय की मांग लगातार उठाई जाती रही। अदालत के इस फैसले को मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी पड़ाव माना जा रहा है।

 
 
 
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Author
Rajendra Harsh
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