42 लाख की साइबर ठगी का मुख्य आरोपी गिरफ्तार

जोधपुर। पुलिस थाना बासनी ने साइबर अपराधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 42 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में वांछित मुख्य आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। आरोपी पिछले 18 माह से फरार चल रहा था, जिसे पश्चिम बंगाल के कोलकाता से गिरफ्तार किया गया। पुलिस की विशेष टीम ने तीन दिन तक लगातार निगरानी रखने के बाद आरोपी को दस्तयाब किया।गिरफ्तार आरोपी की पहचान अभय उर्फ अवॉय (28) पुत्र लक्ष्मी मंडल निवासी मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल के रूप में हुई है

 

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जोधपुर। पुलिस थाना बासनी ने साइबर अपराधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 42 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में वांछित मुख्य आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। आरोपी पिछले 18 माह से फरार चल रहा था, जिसे पश्चिम बंगाल के कोलकाता से गिरफ्तार किया गया। पुलिस की विशेष टीम ने तीन दिन तक लगातार निगरानी रखने के बाद आरोपी को दस्तयाब किया।

पुलिस आयुक्त शरत कविराज, पुलिस उपायुक्त पश्चिम कमल शेखावत तथा पुलिस उपायुक्त मुख्यालय एवं यातायात शहीन सी. के निर्देशानुसार यह कार्रवाई की गई। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त नरेंद्र सिंह देवड़ा एवं सहायक पुलिस आयुक्त छवि शर्मा के सुपरविजन में थानाधिकारी नितिन दवे के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने आरोपी की तलाश कर उसे गिरफ्तार किया।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान अभय उर्फ अवॉय (28) पुत्र लक्ष्मी मंडल निवासी मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल के रूप में हुई है। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी साइबर धोखाधड़ी में प्रयुक्त म्यूल बैंक खातों का संचालन करता था और उसके खातों के माध्यम से देश के विभिन्न राज्यों में लाखों रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दिया गया।

मामले के अनुसार 10 जनवरी 2025 को जोधपुर निवासी ललित कुमार ने साइबर पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। शिकायत में बताया गया कि 14 नवंबर 2024 को एक अज्ञात युवती ने फोन कर उसे "वीवीआईपी क्लब फ्रेंड्स फॉर एवर" नामक क्लब की सदस्यता दिलाने का झांसा दिया। शुरुआत में सदस्यता शुल्क के नाम पर 1,950 रुपये जमा करवाए गए। इसके बाद निवेश की गई राशि वापस मिलने और अधिक लाभ का लालच देकर लगातार रकम जमा करवाई जाती रही।

आरोपियों ने 14 नवंबर से 29 दिसंबर 2024 के बीच अलग-अलग बैंक खातों में कुल 42 लाख 23 हजार 141 रुपये ट्रांसफर करवा लिए। जब ठगों ने और अधिक पैसे की मांग की तब पीड़ित को अपने साथ हुई धोखाधड़ी का पता चला।

मामले में भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों और बैंक खातों की जानकारी जुटाने में लगी हुई है।

 
 
 
 
 
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Author
Rajendra Harsh
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